अमरावती (आंध्र प्रदेश), चार सितंबर केंद्र ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ लंबे समय से लंबित केंद्र-राज्य समन्वय वाले मुद्दों, खासतौर पर आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून-2014 में सूचीबद्ध मुद्दों पर चर्चा के लिए छह सितंबर को बैठक बुलाई है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिवालय ने राज्य सरकार को सूचित किया कि इस्पात, जल संसाधन, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन, पर्यावरण और वन, उद्योग एवं आतंरिक कारोबार व रक्षा अनुसंधान एवं विकास से संबंधित विभागों के मुद्दों की समीक्षा सोमवार को अपराह्न तीन बजकर 30 मिनट पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये की जाएगी।
आंध्र प्रदेश का विभाजन करने के बाद सात साल का समय बीत चुका है लेकिन अधिनियम में किए गए कई प्रमुख वादे अबतक पूरे नहीं किए गए हैं। इनमें कडपा जिले में इस्पात कारखाना लगाना और काकीनाडा में ग्रीनफील्ड खनिज तेल शोधन संयंत्र और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का निर्माण प्रमुख है। ये दो उन 13 मुद्दों में शामिल हैं, जिनकी सोमवार की बैठक में समीक्षा की जाएगी।
शीर्ष सरकारी अधिकारी ने यहां बताया, ‘‘पहली बार केंद्र सरकार लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए उच्च स्तरीय आधिकारिक बैठक करने जा रही है। उम्मीद है कि कम से कम अब इसपर कुछ सामने आएगा।’’
रोचक तथ्य है कि राज्य में नया बंदरगाह स्थापित करने का मुद्दा सोमवार की बैठक की कार्यसूची में शामिल नहीं है जबकि अधिनियम में इस संबंध में वादा किया गया था।
कैबिनेट सचिवालय के पत्र के मुताबिक, पोलावरम बहुद्देशीय परियोजना पर पड़ोसी राज्यों ओडिशा और छत्तीसगढ़ में जन सुनवाई करना, परियोजना पर रोक संबंधी आदेश को रद्द करना, विशाखापत्तनम में पेट्रोलियम विश्वविद्यालय स्थापित करना, विशाखापत्तनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारा, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और तिरुपति हवाई अड्डे का विस्तार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना संबंधी कुछ मुद्दे हैं, जिनकी समीक्षा सोमवार की बैठक में होगी।
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