देश की खबरें | निजी स्वतंत्रता, अधिकारों की रक्षा संबंधी फैसलों के कारण केंद्र न्यायपालिका पर हमले कर रहा : माकपा

नयी दिल्ली, 22 दिसंबर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने वाले हाल के अदालती फैसलों को लेकर वह न्यायपालिका पर हमलावर है।

पार्टी ने अपने दावों के समर्थन में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रीजीजू द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों का भी हवाला दिया है।

पार्टी के मुखपत्र ‘‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’’ के नवीनतम संस्करण के संपादकीय में उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की संसद में की गई टिप्पणी को लेकर भी कटाक्ष किया गया है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम 2014 को निरस्त करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को ‘‘संसदीय स्वायत्ता पर हमला करार दिया है।’’

संपादकीय में दावा किया गया है, ‘‘मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय पर अपने हमले तेज कर दिये हैं। पिछले कुछ हफ्तों में, केंद्रीय कानून मंत्री रीजीजू, संसद के बाहर और अंदर दोनों जगह बयान दे रहे हैं और न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली को संविधान से अलग बताकर उसकी आलोचना कर रहे हैं।’’

इसमें हाल के दिनों में अदालतों द्वारा दिये गये कई फैसलों पर प्रकाश डाला गया, जिनमें तीस्ता सीतलवाड़ और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम अधिनियम) के तहत दो साल से जेल में बंद सिद्दीक कप्पन को दी गई अंतरिम जमानत, कार्यकर्ता गौतम नवलखा की घर पर नजरबंदी रखने की अनुमति देना और बंबई उच्च न्यायालय द्वारा आनंद तेलतुंबडे को जमानत देना शामिल हैं।

माकपा ने कहा कि यही वे फैसले हैं, जिन्हें सरकार रोकना चाहती है।

संपादकीय में कहा गया है कि तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश यू यू ललित के छोटे से कार्यकाल और अब तक, शीर्ष अदालत ‘‘उन लोगों की जमानत याचिकाओं पर अधिक ध्यान दे रही है जो लंबे समय से जेल में हैं और जिनकी जमानत याचिका निचली अदालतों द्वारा खारिज कर दी गई थी।’’

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