भुवनेश्वर, 13 फरवरी पुरातात्विक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में विकास कार्य प्रतिबंधित करने संबंधी राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण की मसौदा अधिसूचना केन्द्र द्वारा वापस लिए जाने के बाद ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राजग सरकार से अनुरोध किया है कि वह भुवनेश्वर स्थित लिंगराज और ब्रह्मेश्वर मंदिर के लिए भी ऐसे कदम उठाएं।
इस मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा की जनता और पटनायक को आश्वासन दिया है कि केन्द्र सरकार राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण के हालिया मसौदा अधिसूचना से जुड़े मुद्दों पर संस्कृति गौरव और स्थानीय भावनाओं का सम्मान करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेगी।
बीजद सांसदों के एक शिष्टमंडल ने नयी दिल्ली में शनिवार को केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से भेंट की और केन्द्र सरकार द्वारा लिंगराज मंदिर के संबंध में किए गए उप-प्रवधानों को हटाने का अनुरोध किया।
चूंकि केन्द्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल दिल्ली में नहीं थे इसलिए बीजद सांसदों ने जोशी से मुलाकात की।
प्रस्तावित विरासत नियमों में किसी भी पुरातात्विक स्थल से 100 मीटर के दायरे में विनिर्माण कार्यों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इससे ओडिशा सरकार की लिंगराज मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र को विरासत स्थल के रूप के विकसित करने की योजना खटाई में पड़ती दिख रही है। इस योजना पर करीब 700 करोड़ रुपये के लागत का अनुमान है।
कुछ लोग इन उपबंधों की इसलिए भी आलोचना कर रहे हैं कि लिंगराज मंदिर में ईश्वर की पूजा होती है, लेकिन नियमों ने उसे संग्रहालयों और अन्य विरासत भवनों की श्रेणी में ला खड़ा किया है।
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