देहरादून, 29 अक्टूबर केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव के स्तर पर एमपैनलमेंट, 360 डिग्री अप्रेजल और लेटरल एंट्री की वर्तमान प्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को केंद्र ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की इलाहाबाद पीठ से दिल्ली पीठ को स्थानांतरित किए जाने की मांग की है ।
पीटीआई के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र ने कैट अध्यक्ष न्यायमूर्ति एल नरसिंहमन रेडडी को 13 अक्टूबर को इस संबंध में एक अर्जी दी है जिसमें सुनवाई को स्थानांतरित करने की मांग की गई है ।
याचिका इस साल की शुरूआत में हल्द्वानी स्थित मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी द्वारा दायर की गयी थी ।
'360 डिग्री अप्रेजल' का मतलब साथियों, मातहतों और वरिष्ठ सहयोगियों द्वारा आंकलन किया जाना है ।
याचिका के अनुसार, एक संयुक्त संसदीय समिति ने भी 2017 में इस प्रणाली में पारदर्शिता की कमी पाई थी ।
केंद्र के इस कदम ने कानूनी विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है जिनका कहना है कि व्यक्तिगत तौर पर लोग अपनी सुविधा के अनुसार मामले को एक पीठ से दूसरी पीठ में स्थानांतरित करने की मांग करते हैं लेकिन सरकारें सामान्यत: ऐसा नहीं करतीं ।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, नैनीताल, के पूर्व महासचिव संदीप तिवारी ने कहा, 'एक मामले के स्थानांतरण को लेकर सरकार का न्यायाधिकरण में जाना बहुत दुर्लभ बात है । संविधान के अनुसार, भारत राज्यों का संघ है और सरकार को इस बात से फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि मामला दिल्ली में सुना जा रहा है या इलाहाबाद में।'
तीन सितंबर को कैट की इलाहाबाद पीठ ने संघ लोक सेवा आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए उन्हें चतुर्वेदी की याचिका के मामले में अपनी आपत्तियां दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया था और सुनवाई की अगली तारीख 22 सितंबर तय की थी ।
हांलांकि, इस संबंध में आपत्तियां दाखिल न किए जाने के बाद इलाहाबाद पीठ ने 15 अक्टूबर की तारीख तय की लेकिन इसी बीच केंद्र सरकार ने कैट से मामले की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित करने की अर्जी दे दी ।
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