नयी दिल्ली, दो जुलाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) उन कई लोगों की भूमिका की जांच कर रहा है जिन्होंने करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदने में वाप्कोस के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) राजिंदर गुप्ता की कथित तौर पर मदद की थी। एजेंसी ने अपने आरोपपत्र में यह बात कही।
सीबीआई ने गुप्ता को आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार करने के साथ ही उनके परिसरों से 38 करोड़ रूपये से अधिक की नकदी जब्त की थी।
सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष हाल में दायर आरोपपत्र में, एजेंसी ने आरोप लगाया है कि गुप्ता ने एक अप्रैल, 2011 से 31 मार्च 2019 तक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम, वाप्कोस के सीएमडी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 109 और 201 (साक्ष्यों को नष्ट करना) के तहत दायर आरोपपत्र में गुप्ता और उनकी पत्नी रीमा सिंगल को आरोपी के रूप में नामित किया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि अन्य कथित आरोपियों की संलिप्तता की जांच अभी भी जारी है।
गुप्ता और उनके बेटे गौरव सिंगल को एजेंसी द्वारा उनके परिसरों में 38.71 करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने के बाद तीन मई को गिरफ्तार किया गया था। ये दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
एक विशेष अदालत ने गौरव सिंगल द्वारा हाल में दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।
अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान, सीबीआई को लगभग 4.99 करोड़ रुपये मूल्य की पांच संपत्तियां मिलीं, जो गुप्ता और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा हुडा (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) से कथित तौर पर खरीदी गई थीं।
उन्होंने बताया कि एजेंसी ने पाया कि गौरव सिंगल ने हुडा के संपदा अधिकारी के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट और भुगतान आदेश प्राप्त करने के लिए कई व्यक्तियों को नकद राशि कथित तौर पर प्रदान की, जिसका उपयोग भूखंडों और संपत्तियों के भुगतान के लिए किया गया था।
एजेंसी डिमांड ड्राफ्ट और भुगतान आदेश प्राप्त करने में कथित तौर पर शामिल इन व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि गुप्ता के बेटे ने आय से अधिक संपत्ति जमा करने में मदद करने में भूमिका निभाई और वाप्कोस से संबंधित मामलों में उसके प्रभाव की अभी भी जांच जारी है।
गौरतलब है कि दो मई को दिल्ली के पीतमपुरा, गुरुग्राम और चंडीगढ़ में गुप्ता और सिंगल के परिसरों पर की गई छापेमारी के दौरान, एजेंसी ने संपत्तियों के विवरण के साथ ही भारी नकदी बरामद की थी।
वाप्कोस को पहले ‘वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड’’ के नाम से जाना जाता था। यह एक सरकार के स्वामित्व वाला केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम है और इसका प्रशासनिक नियंत्रण जल शक्ति मंत्रालय के पास है।
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