नयी दिल्ली, 26 जुलाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुग्राम में एक कॉलसेंटर पर कार्रवाई करते हुए 43 संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इन संदिग्ध साइबर अपराधियों को विदेशी नागरिकों के कंप्यूटरों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने का वादा करके उनसे धोखाधड़ी करते हुए पकड़ा गया है।
उन्होंने बताया कि सीबीआई ने गुरुग्राम के डीएलएफ साइबर सिटी से संचालित‘इनोसेंट टेक्नोलॉजी (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक कंपनी पर मामला दर्ज किया और उसके कार्यालय पर छापा मारा।
सीबीआई ने ‘ऑपरेशन चक्र-तीन’ के तहत यह कार्रवाई की है, जिसका लक्ष्य 2022 से विभिन्न देशों से संचालित ऑनलाइन वित्तीय अपराध नेटवर्क को तोड़ना है।
दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा में सात स्थानों पर तलाशी ली गई। इस अभियान के दौरान साइबर अपराधों से जुड़े विशेषज्ञों वाला एक विशेष कार्यबल कॉलसेंटर पहुंचा और उसने पाया कि कई कर्मी ‘लाइव’ साइबर अपराध गतिविधियों में लगे हैं। फलस्वरूप कार्यबल को मुकदमा चलाने योग्य सामग्री हाथ लगी।
सीबीआई प्रवक्ता ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ‘‘सीबीआई इस संबंध में सुराग और आगे की कार्रवाई के लिए इंटरपोल के माध्यम से एफबीआई एवं कई देशों की कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ सक्रियता से समन्वय कर रही है।’’
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने छापे के दौरान 130 कंप्यूटर हार्डडिस्क, 65 मोबाइल, पांच लैपटॉप, अभियोजन योग्य सामग्री, वित्तीय लेन-देन विवरण, ‘कॉल रिकार्डिंग’ और पीड़ितों की जानकारियां, बातचीत के लिप्यांतरण आदि जब्त किये।
ब्यूरो ने आरोप लगाया है कि निशाने पर लिये जाने वालों को अपने ‘सिस्टम’ (कंप्यूटर) में ‘मैलिसियस’ (गड़बड़ी वाले) सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने के लिए राजी किया जाता था, जिससे उनके कंप्यूटर बंद हो जाते थे।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इसके बाद पीड़ितों को अपने ‘सिस्टम’ को सही करने के लिए भुगतान करने के लिए कहा जाता था। यह पता चला है कि अपराध से होने वाली कमाई कई देशों से हांगकांग पहुंचाई जाती थी।’’
उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई तब शुरू की गई जब सीबीआई को पता चला कि इस नेटवर्क में अंतरराष्ट्रीय साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों का समन्वय केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा था, जिसका निर्देशन मुख्य रूप से गुरुग्राम के डीएलएफ साइबर सिटी से संचालित कॉल सेंटर से किया जा रहा था।
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