नयी दिल्ली, सात फरवरी दिल्ली की एक अदालत ने पश्चिम बंगाल मवेशी तस्करी से जुड़े धन शोधन के एक मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता अनुब्रत मंडल के पूर्व अंगरक्षक सहगल हुसैन को जमानत देने से इनकार कर दिया है।
न्यायाधीश ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एक अन्य अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के संबंधित मामले में आरोपी को यह कहते हुए जमानत नहीं दी कि हुसैन ने अपने या अपने रिश्तेदारों द्वारा अर्जित आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के संबंध में कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं दिया।
पश्चिम बंगाल में अदालत ने कहा था कि मामले के एक अन्य प्रभावशाली आरोपी के अंगरक्षक के तौर पर हुसैन की भूमिका अब भी जांच के घेरे में है और आए दिन नयी जानकारी सामने आ रही है।
विशेष न्यायाधीश रघुबीर सिंह ने छह फरवरी को पारित आदेश में कहा, ‘‘सीबीआई के विशेष न्यायाधीश द्वारा की गयी टिप्पणियां भी मौजूदा संदर्भ में प्रासंगिक हैं, क्योंकि ईडी का मामला सीबीआई के मामले के आधार पर दर्ज किया गया। अत: यह साफ हो गया है कि तथ्यों को देखते हुए जमानत याचिका खारिज की जाती है।’’
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पैरवी करने वाले विशेष लोक अभियोजक नितेश राणा ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी और उसके परिवार ने 2015 से 2022 के दौरान 59 अचल संपत्तियां खरीदीं।
वहीं, आरोपी ने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि वह अपने परिवार का कमाने वाला इकलौता सदस्य है। आरोपी ने दावा किया कि मामले में आरोप पत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है और उसे हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य सिद्ध नहीं होगा।
एजेंसी ने इस मामले में सात अक्टूबर 2022 को आरोपी को गिरफ्तार किया था। ईडी ने भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए मवेशियों की तस्करी के सीबीआई के एक मामले के आधार पर मामला दर्ज किया था।
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