नयी दिल्ली, 24 सितंबर कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि राफेल विमान सौदे के ऑफसेट अनुबंध से ‘प्रौद्योगिकी हस्तांतरण’ (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) को हटा दिया गया।
पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने ट्वीट किया, ‘‘कैग ने पाया कि राफेल विमान के विक्रेताओं ने ऑफसेट अनुबंध के तहत 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण' की पुष्टि नहीं की है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऑफसेट अनुबंध से जुड़े दायित्वों को 23-9-2019 को शुरू होना चाहिए था और पहली वार्षिक प्रतिबद्धता 23 सितंबर, 2020 तक पूरी होनी चाहिए थी। क्या सरकार बताएगी कि वो दायित्व पूरा हुआ या नहीं?’’
चिदंबरम ने यह सवाल भी किया कि क्या कैग ने 'जटिल समस्याओं का पिटारा' खोलने वाली रिपोर्ट दी है?
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कांग्रेस महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘‘सबसे बड़े रक्षा सौदे की क्रोनोलॉजी लगातार सामने आ रही है। नयी कैग रिपोर्ट में इसको स्वीकार किया गया है कि ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ को रॉफेल के ऑफसेट सौदे में हटा दिया गया।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘पहले जो ‘मेक इन इंडिया’ था वो ‘मेड इन फ्रांस’ बन गया। अब डीआरडीओ ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को छोड़ दिया। मोदी जी कहेंगे- सब चंगा सी।’’
संसद में पेश कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़ाकू विमान बनाने वाली फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन और यूरोप की मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए ने 36 राफेल विमानों की खरीद से संबंधित सौदे के हिस्से के रूप में भारत को उच्च प्रौद्योगिकी की पेशकश के अपने ऑफसेट दायित्वों को अभी तक पूरा नहीं किया है।
दसॉ एविएशन राफेल जेट की विनिर्माता कंपनी है, जबकि एमबीडीए ने विमान के लिये मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति की है।
कैग ने कहा कि उसे विदेशी विक्रेताओं द्वारा भारतीय उद्योगों को उच्च प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने का एक भी मामला नहीं मिला है।
हक
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