जरुरी जानकारी | मंत्रिमंडल ने कपड़ा क्षेत्र में सहयोग को लेकर भारत-जापान के बीच समझौते को दी मंजूरी

नयी दिल्ली, दो सितंबर सरकार ने बुधवार को जापान के बाजार में भारत के कपड़े और परिधान के निर्यात को बढ़ाने और इस क्षेत्र में सहयोग मजबूत बनाने के इरादे से दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर की मंजूरी दे दी।

सझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने से व्यापार आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के अनुकूलतम लाभ के लिये क्षेत्रों को चिन्हित करने में मदद मिलेगी और जापानी बाजार के लिये भारतीय कपड़ा तथा परिधान की गुणवत्ता और परीक्षण में सुधार होगा। दोनों देशों ने सीईपीए पर हस्ताक्षर किये हैं।

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एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जापानी बाजार के लिये भारतीय वस्त्रों व परिधानों की गुणवत्ता एवं परीक्षण को बेहतर करने के लिये वस्‍त्र समिति (भारत) और मैसर्स निसेनकेन क्वालिटी इवैल्यूएशन सेंटर (जापान) के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये जाने को मंजूरी दे दी है।’’

कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्वीट किया, ‘‘इस समझौते से जापान के तकनीकी नियमन के तहत वहां के आयातकों की आवश्यकता के हिसाब से भारतीय कपड़ों का निर्यात सुगम हो सकेगा।’’

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उन्होंने कहा कि इससे जापान को तकनीकी परिधानों समेत भारतीय वस्त्रों व परिधानों का निर्यात बढ़ाने में निर्यातकों की मदद करेगा।

भारत ने जापान के साथ सीईपीए पर हस्ताक्षर किया था ताकि शून्य शुल्क पर जापान, भारत से परिधान का आयात कर सके।

कपड़ा मंत्रालय के अनुसार यह देश के कपड़ा उद्योग को बड़ा अवसर उपलब्ध कराता है क्योंकि जापान दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा परिधान आयातक देश है। हालांकि भारत की जापानी बाजार में हिस्सेदारी अभी भी बहुत कम है।

यह एमओयू मेसर्स निसेनकेन क्वालिटी इवैल्यूएशन सेंटर को वस्‍त्र और परिधान उत्पादों के लिये भारत में अपने सहकारी परीक्षण एवं निरीक्षण सेवा प्रदाता के रूप में वस्त्र समिति को निर्दिष्‍ट करने में सक्षम करेगा।

इन वस्‍त्र और परिधान उत्‍पादों में तकनीकी वस्त्र के साथ-साथ ऐसा कोई अन्य उत्पाद भी शामिल हो सकेगा, जिन पर घरेलू और विदेशी ग्राहकों/खरीदारों दोनों के लिये बाद की किसी तिथि पर परस्पर सहमति व्यक्त की जायेगी।

ईरानी ने समझौते की मंजूरी देने को लेकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल को धन्यवाद भी दिया।

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