मुंबई, 21 जून मुंबई की एक सत्र अदालत ने मंगलवार को 'बुली बाई' ऐप मामले में गिरफ्तार तीन छात्रों को जमानत दे दी।
ऐप ने कई मुस्लिम महिलाओं का विवरण ‘‘नीलामी’’ के लिए सार्वजनिक किया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए बी शर्मा ने नीरज बिश्नोई, ओंकारेश्वर ठाकुर और नीरज सिंह को जमानत दे दी।
बिश्नोई ने अधिवक्ता शिवम देशमुख के माध्यम से दायर अपनी जमानत याचिका में दावा किया कि उसे मामले में झूठे ही फंसाया गया है और अपने सह-आरोपियों के साथ समानता का अनुरोध किया जिन्हें जमानत दे दी गई है।
इससे पहले अप्रैल में बांद्रा की मजिस्ट्रेट अदालत ने विशाल कुमार झा, श्वेता सिंह और मयंक अग्रवाल को जमानत दे दी थी।
पुलिस ने मार्च में दायर अपने आरोपपत्र में दावा किया था कि बिश्नोई ने एक सह-आरोपी को 100 ‘‘जानीमानी गैर-भाजपा मुस्लिम महिलाओं’’ की तस्वीरें भेजने के लिए कहा ताकि उन्हें नीलामी के लिए डाला जा सके।
आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि बिश्नोई ने सबसे पहले बुल्ली बाई ऐप का लिंक अपने ट्विटर ग्रुप पर साझा किया था और समूह के सदस्य इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे कि इसका इस्तेमाल मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा।
हालांकि कोई वास्तविक नीलामी या बिक्री नहीं हुई, ऐप का उद्देश्य लक्षित महिलाओं को अपमानित करना और धमकाना था, जिनमें से कई सक्रिय सोशल मीडिया उपयोगकर्ता हैं।
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