नयी दिल्ली, दो फरवरी देश के प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में गिने जाने वाले भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) के बजट में इस साल कटौती की गई है और केंद्र ने उनका अनुदान घटाकर आधा कर दिया है।
हालांकि, शीर्ष संस्थानों का मानना है कि इस कदम से नए आईआईएम को नुकसान हो सकता है, लेकिन दूसरी या पहली पीढ़ी के आईआईएम को नहीं।
देश भर में 20 आईआईएम हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बुधवार को घोषित 2023-24 के बजट में आईआईएम के लिए वित्तीय अनुदान 608.23 करोड़ रुपये के पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान से कम करके 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 50.67 प्रतिशत की गिरावट है। वहीं, उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2023-24 का शुद्ध बजट आठ प्रतिशत वृद्धि के साथ 44,094 करोड़ रुपये हो गया।
वर्ष 2022-23 के बजट अनुमान के अनुसार, आईआईएम को 653.92 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी।
आईआईएम उदयपुर के निदेशक अशोक बनर्जी के अनुसार, सरकार आईआईएम को उनकी विकास योजनाओं के वित्तपोषण में अधिक नवोन्मेषी होने के संकेत भेज सकती है।
बनर्जी ने पीटीआई- से कहा, ‘‘आईआईएम के लिए बजट आवंटन में कटौती से नए आईआईएम को नुकसान हो सकता है, हालांकि नवीनतम आईआईएम करीब सात साल पुराना है।’’
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