कोरोना वायरस के खतरे के बावजूद बीआरओ ने राज़दान, ज़ोजिला दर्रे समय से पहले खोले
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श्रीनगर/जम्मू, 11 मई सीमा सड़क सड़क संगठन (बीआरओ) ने श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर ज़ोजिला और बांदीपोरा-गुरेज़ राजमार्ग पर राज़दान दर्रे इस साल समय से पहले यातायात के लिए फिर से खोल दिए। यह काम दुनियाभर में कोविड-19 महामारी के खतरे के बावजूद समय से पहले कर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि 86 किलोमीटर लंबा बांदीपुरा-गुरेज़ मार्ग चार महीने बंद रहने के बाद यातायात के लिए खोला गया। यह राज़दान दर्रे पर भारी बर्फबारी के बाद बंद हो गया था। राज़दान दर्रा समुद्र तल से 11,560 फुट ऊपर है। इसे पिछले साल की तुलना में इस करीब एक महीने पहले यानी 17 अप्रैल को खोला गया।

उन्होंने बताया कि इसी तरह से श्रीनगर-ज़ोजिला-लेह मार्ग को चार महीने के बंद रहने के बाद मार्च में फिर से खोल दिया गया, जबकि पिछले साल इसे अप्रैल के अंत में खोला गया था।

अधिकारियों ने बताया कि इन दर्रों पर पिछले साल भारी बर्फबारी के बावजूद, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के ‘प्रोजेक्ट बीकन’ के तहत गगनगीर से जीरो प्वाइंट तक बर्फ हटाने का अभियान चलाया गया। लेह की ओर यातायात शुरू करने के लिए ऐसा ही प्रोजेक्ट विजक के जरिए द्रास से ज़ीरो प्वाइंट की ओर किया गया।

प्रोजेक्ट बीकन के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर रवि नवेत ने कहा कि बीआरओ ने ऊंचाई पर स्थित इन दोनों दर्रों पर से बर्फ हटाने का काम काफी अच्छे तरीके से किया।

उन्होंने बताया, ”बर्फ हटाने वाली टीमों ने अपना अभियान एक महीने पहले ही शुरू कर दिया। उन्हें कंपकपा देने वाली ठंड और सर्द हवाओं का सामना करना पड़ा। इससे भी ज्यादा उन्हें हिमस्खलन का भी सामना करना पड़ा, जो ऊंचाई पर स्थित दर्रों पर हमारे जवानों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा था।”

उन्होंने बताया, ”हमारे जवान ज़ोजिला दर्रा पर हुए हिमस्खलन के दौरान बाल बाल बचे थे, इसके बाद भी उनकी दृढ़ता कमजोर नहीं पड़ी।”

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