नयी दिल्ली, 25 जून भारतीय निर्यातकों के महासंघ फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (फियो) का कहना है कि चीनी उत्पादों का बहिष्कार संभवतया उतना कारगर नहीं है। वजह घरेलू उद्योगों का पड़ोसी मुल्क से आने वाले सामान पर निर्भर होना है।
निर्यातकों के संगठन फियो के अध्यक्ष एस. के. सर्राफ ने कहा कि चीनी सामान पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें सीमित करने में भारत को सावधानी बरतने की जरूरत है।
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उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संवाददाताओं से कहा कि यह व्यवहारिक नहीं है क्योंकि हम बहुत ज्यादा चीनी उत्पादों पर निर्भर करते हैं।
सर्राफ ने कहा कि भारत चीनी सामान पर अपनी निर्भरता तभी कम कर सकता है जब वह उन सामानों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाए जिनके लिए वह दूसरे बाजारों पर निर्भर है।
लद्दाख में चीन और भारत के बीच सीमा विवाद और हिंसक झड़प के बाद देशभर के विभिन्न हल्कों में चीनी सामान के बहिष्कार की भावना बढ़ रही है। यहां तक कि छोटे व्यापारियों के संगठन कैट ने इस संबंध में एक जागरुकता अभियान ‘भारतीय सामान-हमारा अभिमान’ भी चलाया हुआ है। चीन के साथ हिंसक झड़प में गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।
सर्राफ ने कहा कि यह हमें लोगों पर छोड़ देना चाहिए कि उन्हें चीनी सामान खरीदना है या नहीं। चीनी सामान के मामले में एक झटके में प्रतिक्रिया देना ठीक नहीं होगा।
फियो के मुताबिक भारत का चीन को निर्यात 2019 में 16.5 अरब डॉलर से बढ़कर 16.95 अरब डॉलर हो गया। जबकि चीन से होने वाला आयात 73.8 अरब डॉलर से घटकर 68.2 अरब डॉलर पर आ गया।
इसी तरह भारत का हांगकांग को निर्यात 2019 में 11.5 अरब डॉलर रहा जबकि वहां से आयात 17.3 अरब डॉलर रहा।
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