नयी दिल्ली, चार अगस्त सरकार ने मंगलवार को कहा कि खुदरा व थोक ग्राहकों को पेट्रोल तथा डीजल की बिक्री के लिए उदारीकृत लाइसेंस हासिल करने के लिये कम से कम 500 करोड़ रुपये नेटवर्थ वाली इकाई ही पात्र होगी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नवंबर, 2019 की उदारीकृत लाइसेंस व्यवस्था पर एक वक्तव्य में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि 250 करोड़ रुपये नेटवर्थ तक की इकाई या तो थोक या फिर केवल खुदरा ग्राहकों को ही पेट्रोल ओर डीजल की बिक्री का लाइसेंस प्राप्त कर सकती है।
यह भी पढ़े | 7th Pay Commission: लॉकडाउन में फंसे केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत, जारी की गई अधिसूचना.
बयान में कहा गया है कि जो इकाइयां खुदरा और थोक दोनों ग्राहकों को ईंधन बिक्री का लाइसेंस चाहती हैं उनका न्यूनतम नेटवर्थ आवेदन के समय 500 करोड़ रुपये होना चाहिए।
पिछले साल सरकार ने गैर-तेल कंपनियों को इस कारोबार में उतरने की अनुमति देने को वाहन ईंधन के बिक्री कारोंबार के नियमों को उदार किया था। इससे निजी और विदेशी कंपनियों को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजार में उतरने में मदद मिलेगी।
यह भी पढ़े | तमिलनाडु: ऑनलाइन क्लासेस के लिए स्मार्टफोन न मिलने पर 10वीं कक्षा के छात्र ने कथित तौर पर की आत्महत्या.
इससे पहले तक किसी कंपनी को भारत में ईंधन के खुदरा कारोबार के लिए लाइसेंस पाने के वास्ते हाइड्रोकॉर्बन खोज और उत्पादन, रिफाइनिंग, पाइलाइन या तरलीकृत गैस (एनएलजी) टर्मिनल में 2,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की शर्त थी।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि सरकार ने 8 नवंबर, 2019 को पेट्रोल और डीजल की थोक या खुदरा बिक्री के लिए अनुमति के सरल दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया।
बयान में कहा गया है कि कोई भी कंपनी जो पेट्रोल और डीजल की थोक या खुदरा बिक्री करना चाहती है उसका नेटवर्थ कम से कम 250 करोड़ रुपये होना चाहिए। वहीं जो इकाई थोक और खुदरा बिक्री दोनों करना चाहती है उसका नेटवर्थ कम से कम 500 करोड़ रुपये होना चाहिए। इस बारे में आवेदन तय फॉर्म में सीधे मंत्रालय को किया जा सकता है।
खुदरा बिक्री के लिए इकाइयों को कम से कम 100 खुदरा बिक्री केन्द्र स्थापित करने होंगे।
नवंबर, 2019 की अधिसूचना के अनुसार इन कंपनियों के लिए परिचालन शुरू करने के तीन साल के भीतर कम से कम एक वैकल्पिक ईंधन मसलन सीएनजी, एलएनजी या जैव ईंधन या इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सुविधाओं को लगाना अनिवार्य होगा। खुदरा विक्रेताओं को पांच साल में कम से पांच प्रतिशत बिक्री केन्द्र ग्रामीण इलाकों में स्थापित करने होंगे।
नई नीति से ईंधन के खुदरा कारोबार में विदेशी सहित निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार ने आखिरी बार 2002 में ईंधन विपणन शर्तें तय की थीं। नवंबर, 2019 में उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर इनमें बदलाव किए गए।
अजय
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY