न्यूयॉर्क, 11 जुलाई भारतीय मूल के एक डॉक्टर समेत सर्जनों की एक टीम ने एक मरीज के दोनों फेफड़ों का प्रतिरोपण किया जो कोविड-19 बीमारी से खराब हो गए थे। एक महीने में यह दूसरी बार है जब डॉक्टरों की इसी टीम ने किसी मरीज के दोनों फेफड़ों का प्रतिरोपण किया।
इलिनोइस के 60 साल की उम्र के इस मरीज ने 100 दिन ईसीएमओ पर बिताए। ईसीएमओ एक ऐसी जीवन रक्षक मशीन है जो दिल और फेफड़ों का काम करती है।
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इस व्यक्ति की पिछले सप्ताहांत नॉर्थवेस्टर्न मेमोरियल अस्पताल में सर्जरी हुई।
सात दिनों में फेफड़ों का सात प्रतिरोपण करने वाले डॉ. अंकित भारत ने कहा, ‘‘ऐसे जटिल मरीजों में लगातार फेफड़ों का प्रतिरोपण करना चुनौतीपूर्ण काम है और मुझे अपनी टीम के समर्पण पर बेहद गर्व है।’’
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यह मरीज मार्च में कोविड-19 की चपेट में आया था।
डॉ. भारत ने कहा, ‘‘संयोग से प्रतिरोपण मरीज के ईसीएमओ प्रणाली पर रहने के 100वें दिन हुआ।’’
आमतौर पर दोनों फेफड़ों के प्रतिरोपण में छह से सात घंटे का वक्त लगता है लेकिन कोरोना वायरस बीमारी के चलते फेफड़ों के ज्यादा खराब हो जाने और छाती में गंभीर संक्रमण के कारण इस सर्जरी में करीब 10 घंटे लगे।
डॉ. भारत के नेतृत्व में नॉर्थवेस्टर्न के डॉक्टरों ने जून में कोविड-19 की 20 वर्षीय मरीज के फेफड़े का प्रतिरोपण किया था जिसे अमेरिका में कोरोना वायरस मरीज के फेफड़ों का पहला प्रतिरोपण बताया गया।
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