मुंबई, 12 जून बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में सभी निचली अदालतों को यह ब्योरा देने का शुक्रवार को निर्देश दिया कि कोविड-19 महामारी के दौरान जेलों में भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य से कैदियों को अस्थायी जमानत की कितने याचिकाएं दायर की गई और उन्होंने कितनों पर फैसला दिया।
मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्त की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य कारागार अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे उच्च न्यायालय को जेलों में कैदियों की जांच के लिये अपनाई गई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की भी सूचना दें। इन कैदियों में वे भी शामिल हैं जिनमें कोविड-19 के लक्षण नहीं हैं या जो संक्रमित रोगियों के संपर्क में रहने को लेकर अधिक खतरे में हैं।
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उच्च न्यायालय पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टिज (पीयूसीएल) और अन्य याचिकाकताओं की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
याचिकाओं में राज्य सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है वह अभी मुंबई की ऑर्थर रोड जेल और अन्य जेलों में रखे गये कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। दरअसल, खबरों में यह कहा जा रहा है कि कई कैदी और जेल कर्मी के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है।
याचिकाकर्ताओं के वकील एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने कहा, ‘‘आज, हमने अदालत से कहा कि उसके आदेशों के बावजूद, जमानत याचिकाओं पर शीघ्रता से फैसला नहीं किया जा रहा है, इसलिये अदालत ने सभी निचली अदालतों से ब्योरा मांगा है।’’
पीठ ने जेल अधिकारियों से यह भी बताने को कहा कि क्या उन्होंने कैदियों के लिये वीडियो कॉलिंग सुविधा की व्यवस्था की है क्योंकि महामारी के चलते लागू पाबंदियों को लेकर वे अपने सगे-संबंधियों से नहीं मिल पा रहे हैं।
इस महीने की शुरूआत में ऑर्थर रोड जेल में 158 कैदी और 26 जेल कर्मी के संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी।
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