ठाणे (महाराष्ट्र), 21 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने ठाणे शहर के स्थानीय निकाय को ड्यूटी पर मरने वाले सफाई कर्मियों के परिवारों को मुआवजे की राशि जारी करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि नगर निकाय को हर मामले में उत्तराधिकार संबंधी प्रमाणपत्र की जांच करने की जरूरत नहीं है।
न्यायमूर्ति धीरज सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति संदीप वी. मारने की पीठ ने मंगलवार को श्रमिक जाटा संघ द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश पारित किया।
संगठन के पदाधिकारी जगदीश खैरालिया ने एक विज्ञप्ति में कहा कि ड्यूटी के दौरान मरने वाले 10 कर्मियों के परिवारों को अदालत के इस आदेश से लाभ होगा।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सीवर और निजी भवनों या कोऑपरेटिव सोसाइटी के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मरने वाले सफाई कर्मियों के परिवारों को मुआवजे की राशि मिलने में हो रही देरी के मुद्दे को इस याचिका में उठाया गया है।
पीठ ने कहा कि ठाणे महानगरपालिका ने प्रभावित परिवारों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रस्ताव स्वीकृत किया है, लेकिन वह रकम की अदायगी करने से पहले उत्तराधिकार या परिवार का सदस्य होने का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर जोर दे रहा है।
याचिका दायर करने वालों ने आरोप लगाया है कि उत्तराधिकार प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की मांग के कारण मुआवजे की राशि के भुगतान में देरी हो रही है और उनका खर्च भी बढ़ रहा है।
अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की है।
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