नयी दिल्ली, 14 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका पर जवाब देने के लिए केंद्र को अंतिम मौका दिया जिसमें यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों से ‘बॉइज लॉकर रूम' जैसे समूहों को हटा लिया जाए।
न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति आशा मेनन की पीठ ने निर्देश दिया कि गृह, आईटी और वित्त मंत्रालयों द्वारा चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल किए जाएं।
इस मामले में फेसबुक पहले ही अपना जवाब दाखिल कर चुकी है। अदालत ने गूगल और ट्विटर को भी चार सप्ताह के भीतर अपने जवाब दाखिल करने को कहा।
मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
पीठ ने प्रतिवादियों को चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा। पीठ ने कहा कि अगर वे चार हफ्ते में जवाब देने में नाकाम रहते हैं तो उन्हें और अवसर नहीं दिया जाएगा।
अदालत ने यह आदेश आरएसएस के पूर्व विचारक के एन गोविंदाचार्य द्वारा दायर आवेदन पर दिया है जिसमें ‘बॉइज लॉकर रूम’ जैसे ‘अवैध समूहों की गैरकानूनी प्रकृति’ को उजागर किया गया है।
अदालत ने इससे पहले मई में केंद्र और सोशल मीडिया मंचों को आवेदन पर जवाब देने के लिए कहा था।
जब गोविंदाचार्य की ओर से पेश अधिवक्ता विराग गुप्ता ने अनुरोध किया कि इस आवेदन पर आज ही सुनवाई की जाए, तो अदालत ने कहा कि उसकी राय है कि मुख्य याचिका पर ही सुनवाई होनी चाहिए और याचिका तथा आवेदन पर अलग-अलग सुनवाई से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
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