त्रिशूर (केरल), 14 अप्रैल केरल में ‘विशु कैनीत्तम’ की प्राचीन परंपरा के कारण अभिनेता एवं भाजपा सांसद सुरेश गोपी को विवादों में आ गए हैं । कार में बैठकर पैसे बांटने तथा लोगों द्वारा ‘कैनीत्तम’ ग्रहण करने के बाद उनके पैर छूने का वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद लोगों ने उनकी आलोचना शुरू कर दी है।
हिंदू परंपराओं के अनुसार फसल कटाने के उत्सव विशु के तहत बच्चों, बुजुर्गों एवं महिलाओं को थोड़ी सी धनराशि ‘कैनीत्तम’ के तौर पर दी जाती है। बदले में धन देने वाले को आशीर्वाद दिया जाता है कि उसकी संपत्ति में वृद्धि हो। विशु इस बार 15 अप्रैल को पड़ रहा है।
गोपी ने इसी सप्ताह इससे पहले त्रिशूर में विशाल ‘विशू कैनीत्तम’ वितरण अभियान का आयोजन किया था। भाजपा कार्यकर्ताओं के अलावा उन्होंने बच्चों एवं बुजुर्गों समेत विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच ‘कैनीत्तम के रूप में एक रूपये का नोट बांटा।
गोपी का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल इस माह के अंत में पूरा होने वाला है। वह पिछले केरल विधानसभा चुनाव में त्रिशूर सीट से चुनाव लड़े थे जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली थी।
विवादास्पद वीडियो में गोपी कार में बैठकर पैसे बांटते नजर आ रहे हैं जबकि महिलाओं समेत लोग ‘कैनीत्तम’ ग्रहण करने के लिए उनके सामने लाइन में खड़े दिख रहे हैं। उनमें से कई लोगों को धन लेने के बाद वीडियो में उनके पैर छूते हुए देखा जा सकता है।
इसे लेकर गोपी को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा है। कई लोगों ने कहा कि उनके लिए लोगों खासकर महिलाओं से चरण स्पर्श करवाना उपयुक्त नहीं है।
अपने आलोचकों को ‘‘ टर्राने वाले मेढकों का समूह’ करार देते हुए गोपी ने कहा कि उन्हें ‘विशू कैनीत्तम’ की अच्छी बातें और उन्होंने जो किया उसके पीछे की अच्छी मंशा दिखाई नहीं देती है।
आलोचना को ‘असहिष्णुता’ करार देते हुए गोपी ने कहा कि वह वोट नहीं मांग रहे थे बल्कि बच्चों एवं बुजुर्गों को कैनीत्तम दे रहे थे।
इस मुद्दे पर विवाद बढ़ने पर आयोजकों ने कहा कि उन्होंने लोगों को उपहार ग्रहण करने के बाद अभिनेता का चरण स्पर्श नहीं करने का अनुरोध किया।
इस बीच कैनीत्तम से एक और विवाद पैदा हो गया है जब भाजपा सांसद ने यहां प्रसिद्ध वडाक्कुमथन मंदिर के मुख्य पुरोहित मेलशांति को विशु दिवस के दिन श्रद्धालुओं के बीच बांटने के लिए पैसे दिये।
भाजपा ने कहा कि ऐसा करने में कुछ गलत नहीं है जबकि सत्तारूढ़ माकपा के नेता मुखर होकर उसके खिलाफ सामने आ गये हैं। मंदिर का प्रबंधन करने वाले कोच्चि देवस्वओम बोर्ड ने अगले दिन आदेश जारी कर पुरोहितों को ऐसा करने से मना कर दिया।
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