विपक्षी एआईयूडीएफ पर अपना हमला जारी रखते हुए सरमा ने आरोप लगाया कि उस पार्टी के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल- जिनपर भाजपा असम में बंगाली भाषी मुस्लिमों का पक्ष लेने का आरोप लगाती है- मुख्यमंत्री बन गए होते अगर भगवा पार्टी ने राज्य में अपना आधार नहीं बढ़ाया होता।
सरमा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘असम में पिछले साल राजनीतिक इतिहास बना जब भाजपा नीत गठबंधन एकमात्र गैर कांग्रेसी सरकार बनी जिसने लगातार दूसरी बार राज्य की सत्ता में वापसी की।’’
उत्तर पूर्व लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) के संयोजक सरमा ने कहा कि असम के अलावा भी भाजपा पूरे क्षेत्र में अपना आधार बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा नीत सरकार ने लगातार दूसरे कार्यकाल में असम और अरुणाचल प्रदेश में सत्ता कायम रखी और त्रिपुरा में सरकार बनाई। भगवा पार्टी मणिपुर में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता कायम रखेगी जहां पर इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं जबकि पार्टी अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी अपनी पकड़ तेजी से बना रही है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद भाजपा सरकार क्षेत्र के राज्य में दोबारा सत्ता में आई। भाजपा पूर्वोत्तर में टिके रहने के लिए आई है।’’
सरमा ने दावा किया कि असम में भाजपा की शक्ति के उदय से अजमल पर विराम लगा। उन्होंने कहा, ‘‘अगर भाजपा राज्य में सरकार नहीं बनाती तो अजमल साहब मुख्यमंत्री होतें। 30 साल में हम उसी ओर बढ़ रहे हैं।’’
मुख्यमंत्री ने सवाल किया, ‘‘क्या वह (अजमल) हमारी असमी को बचाने के लिए काम करते?’’ इसके साथ ही उन्होंने लोगों से को संरक्षित रखने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने की अपील की।
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