ताजा खबरें | बिरला ने विपक्षी दल के एक सांसद को दूसरे की अभिव्यक्ति पर सवाल नहीं उठाने को कहा

नयी दिल्ली, 28 मार्च लोकसभा में शुक्रवार को एक निजी संकल्प पर चर्चा के दौरान भाकपा (एम-एल) लिबरेशन के राजाराम सिंह ने भाजपा सदस्य राजीव प्रताप रूडी की टिप्पणी पर आपत्ति जतायी। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सिंह से कहा कि ‘‘दूसरे की अभिव्यक्ति पर सवाल नहीं उठाइए कि वह ऐसा क्यों बोल रहे थे।’’

सदन में गैर-सरकारी कामकाज के तहत कांग्रेस सांसद शफी परम्बिल के ‘देश में हवाई यात्रा किराये के विनियमन के लिए उचित उपाय’ संबंधी निजी संकल्प चर्चा में भाजपा सदस्य राजीव प्रताप रूडी ने अपने विचार रखे थे।

पूर्व नागर विमानन मंत्री रूडी ने विमानन क्षेत्र के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कई कारक गिनाए, जिनकी वजह से विमान किराये अधिक होते हैं।

भाकपा (एम-एल) लिबरेशन सदस्य सिंह ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि इस संकल्प की मूल भावना यह है कि ‘फ्लेक्सी फेयर’ (मांग आधारित किराया वृद्धि) के नाम पर विमान यात्रियों का जो दोहन और शोषण किया जा रहा है, उस पर नागर विमानन मंत्रालय रोक लगाये।

उन्होंने सदन में रूडी के भाषण का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘यह मंत्री जी (के. राममोहन नायडू) की ही रणनीति है कि कुछ बात आप (रूडी) बोल दीजिए, कुछ हम बोल देंगे। आप कुछ कड़वी बात बोल दीजिए, हम कुछ मीठी बात बोल देंगे। मैं इसे उसी रणनीति का हिस्सा मानता हूं।’’

सिंह ने रूडी के भाषण का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने तो इस तरीके से बोला कि ‘‘मुझे महसूस होने लगा कि हम लोग बेकार ही मजदूर-किसान के खून- पसीने की बात करते हैं। उनकी (अमीरों की) चर्बी देश हित के लिए है और वह देश हित के लिए बहुत जरूरी है। इस ढंग से बात रखने की कोशिश की गई। यह ठीक नहीं है। सदन में इस तरह से तर्क देना ठीक नहीं है।’’

इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘माननीय सदस्य कौन क्या बोलेगा...यह तो अपनी-अपनी अभिव्यक्ति रखना है।’’

इस पर राजाराम सिंह ने कहा, ‘‘मैं भी अपनी ही अभिव्यक्ति रख रहा हूं।’’

बिरला ने कहा, ‘‘मैं आपको टोक नहीं रहा हूं, लेकिन आप दूसरे की अभिव्यक्ति पर सवाल मत उठाइये कि वह ऐसा क्यों बोल रहे थे?’’

भाजपा सदस्य निशिकांत दुबे ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘‘‘रूडी जी ने कोई ऐसी बात नहीं कही, जो बुरी लगे। उन्होंने सरकार से ही यह कहा कि आपके इस प्रकार के शुल्क हैं-- सुरक्षा शुल्क, उपयोगकर्ता शुल्क और ईंधन शुल्क। इस आधार पर एयरलाइन कंपनियों के साथ-साथ आपकी भी जिम्मेदारी बनती है कि आप कुछ करें।’’

दुबे ने कहा कि उन्होंने (रूडी) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पक्ष रखा कि आम आदमी को विमान टिकट सस्ते में कैसे मिले। यदि उनकी बात को गलत ढंग से अभिव्यक्त कर रहे हैं तो यह आपकी मर्जी है, लेकिन उन्होंने (रूडी) ने (अपने भाषण में) किसी का बचाव नहीं किया।

सिंह ने कहा कि देश में रेलवे लाइन किसानों की जमीन पर है, सड़कें किसानों की जमीन पर हैं और अधिग्रहण सरकार के नाम पर हुआ है।

उन्होंने कहा कि कुछ ही दूरी के अंतराल पर ‘टोल टैक्स’ लगाया जा रहा है। प्राइवेट कंपनियों को ट्रेनें परिचालित करने के लिए दी जा रही हैं और इसी तरह विमान भी परिचालित करने के लिए दिये जा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम कहना चाहते हैं कि आप सरकारी माल को निजी कंपनियों को लूटने के लिए दे रहे हैं, लेकिन आपकी यह नीति ठीक नहीं है।’’

भाकपा (एम-एल) लिबरेशन सांसद ने कहा, ‘‘इसलिए हमने कहा कि ऐसा लगता है कि किसानों की खून-पसीने की बात करना बेमानी हो गई है, जबकि अमीरों की ‘चर्बी’ की बात करना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।’’

इससे पहले, चर्चा में हिस्सा लेते हुए रूडी ने कहा कि 1980 के दशक और उसके बाद देश में आईं अनेक एयरलाइन बंद हो गईं। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ साल में विमानन उद्योग को होने वाला नुकसान मोटा-मोटा 2200 करोड़ रुपये का रहा।’’

रूडी ने कहा कि हवाई अड्डों पर सुरक्षा लागत, यूजर डवलपमेंट फी (यूडीएफ), राज्य सरकारों द्वारा विमान ईंधन (एटीएफ) पर लगने वाला वैट शुल्क, विमान उपकरण प्रबंधन पर खर्च, टिकट बिक्री प्रमोशन जैसे खर्च भी टिकट में शामिल होते हैं जो सीधे नजर नहीं आते।

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