अमरावती, 21 सितंबर आंध्र प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों में बुधवार को वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (यूएचएस) का नाम बदलकर वाईएसआर यूएचएस करने का एक विधेयक पारित किया। इस दौरान सदन में कुछ अप्रिय स्थिति रही।
पांच दिवसीय मानसून सत्र के अंत में, विपक्षी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और अन्य विपक्षी दलों की आपत्तियों और विरोध के बीच विधान परिषद ने विधेयक को मंजूरी दे दी।
इससे पहले, विधानसभा ने टीडीपी के 12 सदस्यों को सदन से 'निलंबित' किए जाने के बाद विधेयक पारित किया था।
मुख्यमंत्री ने याद किया कि दिवंगत वाईएसआर को लोगों के लिए 104 और 108 जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं लाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने आरोग्यश्री जैसी क्रांतिकारी योजनाओं को भी लागू किया। उन्होंने कहा कि वाईएसआर और वाईएस जगन के शासनकाल में 28 मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए थे, जबकि टीडीपी शासन के दौरान एक भी कॉलेज नहीं बना था।
जगन ने पूछा, ''क्या श्रेय उस व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए जो इसके योग्य है?''
रेड्डी ने दावा किया कि उनके मन में एनटीआर के लिए पूरा सम्मान है।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने एक नवगठित जिले का नाम अभिनेता से राजनेता बने एनटीआर के नाम पर रखा है। इसके बाद विधानसभा ने बिना विरोध के संशोधन विधेयक पारित कर दिया।
जिस समय मुद्दा परिषद में उठाया गया, तो मुख्य विपक्षी दल टीडीपी के सदस्यों ने विरोध शुरू कर दिया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी विश्वविद्यालय का नाम बदलने का विरोध किया।
हालांकि, हंगामे के बीच परिषद के अध्यक्ष मोशेन राजू ने औपचारिकता पूरी की। दोनों सदनों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।
फाल्गुनी नरेश
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