विदेश की खबरें | भारत की बड़ी जीत; अमेरिकी अदालत ने तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की अनुमति दी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

(फाइल फोटो के साथ)

न्यूयॉर्क (अमेरिका), 18 मई अमेरिका की एक संघीय अदालत ने पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यवसायी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण के लिए सहमति दे दी है जो भारत के लिए एक बड़ी कानूनी जीत है। भारत सरकार 2008 के मुंबई आतंकी हमले में संलिप्तता के आरोपी राणा के प्रत्यर्पण की मांग कर रही थी।

अदालत का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका की पहली राजकीय यात्रा से एक महीने पहले आया है। राष्ट्रपति जो बाइडन ने मोदी को इस राजकीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। बाइडन एवं अमेरिका की प्रथम महिला जिल बाइडन 22 जून को उनके सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन करेंगे।

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की अमेरिकी मजिस्ट्रेट न्यायाधीश जैकलीन चोलजियान ने बुधवार को 48 पन्नों का आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत 62 वर्षीय राणा को भारत प्रत्यर्पित करना चाहिए।

आदेश में कहा गया है, ‘‘अदालत ने इस अनुरोध के समर्थन और विरोध में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों की समीक्षा की, उन पर विचार किया है और सुनवाई में प्रस्तुत दलीलों पर भी विचार किया है।’’

अदालत के आदेश में कहा गया है, ‘‘इस तरह की समीक्षा और यहां चर्चा किए गए कारणों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है और अमेरिका के विदेश मंत्री को प्रत्यर्पण की कार्रवाई के लिए अधिकृत करती है।’’

राणा वर्तमान में लॉस एंजिलिस की जेल में है। वह सर्किट कोर्ट में अपील कर सकता है, जो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले को बरकरार रख सकती है। अमेरिकी कानून के मुताबिक, विदेश मंत्री किसी भगोड़े के प्रत्यर्पण के संबंध में फैसला ले सकते हैं।

आदेश में कहा गया है कि अदालत राणा के प्रत्यर्पण को तब तक प्रमाणित नहीं कर सकती थी जब तक कि यह मानने का संभावित कारण न हो कि उसने उस अपराध को अंजाम दिया है जिसके लिए प्रत्यर्पण का अनुरोध किया जा रहा है।

आदेश में कहा गया है, ‘‘इसलिए अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि राणा ने उन अपराधों को अंजाम दिया है जिनके लिए उसके प्रत्यर्पण की मांग की गई है तथा अमेरिका और भारत के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत राणा को भारत प्रत्यर्पित किया जाना चाहिए।’’

दस जून, 2020 को भारत ने प्रत्यर्पण की दृष्टि से राणा की अस्थायी गिरफ्तारी की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। बाइडन प्रशासन ने राणा के भारत प्रत्यर्पण का समर्थन किया था और उसे मंजूरी दी थी।

विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने एक सवाल के जवाब में ‘पीटीआई-’ से कहा ‘‘हम यह कह सकते हैं कि दुनियाभर में हम आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम भारत के साथ अपने आतंकरोधी संबंधों को अत्यधिक महत्व देते हैं। हम 2008 के मुंबई हमलों में शामिल साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में खड़ा करने का आह्वान करते रहेंगे।’’

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