नयी दिल्ली, दो जून यस बैंक-डीएचएफएल बैंक धोखाधड़ी की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में पुणे के एक रियल एस्टेट (संपत्ति) कारोबारी अविनाश भोसले की भूमिका संदेह के घेरे में आई है। भोसले को बिचौलिये के रूप में डीएचएफएल से ऋण दिलाने के एवज में एक अन्य रियल एस्टेट कारोबारी से कथित रूप से 360 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत मिली। डीएचएफएल अब गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) बन गयी है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सीबीआई गिरफ्तार एबीआईएल चेयरमैन अविनाश भोसले की कंपनियों को रेडियस डेवलपर्स द्वारा किये गये 68.8 करोड़ रूपये एवं 292 करोड़ रूपये से अधिक के भुगतान पर चौंक गई गयी। रेडियस डेवलपर्स के मालिक संजय छाबड़िया को हाल में गिरफ्तार किया गया है।
आरोपों पर एबीआईएल ग्रुप से मांगी गयी टिप्पिणयों पर कोई जवाब नहीं मिला। भोसले ऑटो ड्राइवर से रियल एस्टेट कारोबारी बने थे।
वैसे इन भुगतानों को परामर्श शुल्क एवं ऋण के रूप में दर्शाया गया है लेकिन सीबीआई का आरोप है कि ये डीएचएफएल से 2,420 करोड़ रूपये का ऋण प्राप्त करने के वास्ते छाबड़िया द्वारा दी गयी रिश्वत है।
एक अधिकारी ने कहा कि सीबीआई पहली बार बैंक धोखाधड़ी में कथित बिचौलिये तथा दूसरे और तीसरे स्तर के लाभार्थियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। आमतौर पर जांच बैंक अधिकारियों एवं प्राथमिक लाभार्थी को आरोपित करती रही है, भले ही अपराध कुछ हो।
सीबीआई ने हाल में एक विशेष अदालत में कहा था कि राणा कपूर के नेतृत्व में यस बैंक ने डीएचएफएल को 3,983 करोड़ रुपये दिये थे, जो ‘अपराध से की गयी कमाई’ थी। उसने आरोप लगाया था कि डीएचएफएल ने इस रकम में से 2,420 करोड़ रुपये संजय छाबड़िया के रेडियस ग्रुप से संबद्ध तीन समूहों को ऋण के रूप में दिये थे।
सीबीआई का आरोप है कि रेडियस ग्रुप से संबंधित समूहों को मंजूर किये गये ऋण की हेराफेरी की गयी एवं वह डीएचएफएल के खाते में एनपीए बन गया एवं 2,130 करोड़ रुपये की लंबित देनदारी हो गया।
अधिकारियों ने कहा कि रेडियस को डीएचएफएल से धनराशि दिलाने में सहयोग करने के एवज में कथित रिश्वत लेने के सिलसिले में और पूछताछ करने के लिए भोसले को दिल्ली लाया गया, जिसकी उससे पहले मुंबई में जांच की जा रही थी।
सूत्रों ने बताया कि भोसले के परिसरों की तलाशी के दौरा सीबीआई को दस्तावेजों के दो बक्से मिले। एजेंसी उन दस्तावेजों का अध्ययन कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने यह आरोप लगाते हुए 2020 में प्राथमिकी दर्ज की थी कि कपूर ने यस बैंक के मार्फत वित्तीय सहायता पहुंचाने के वास्ते डीएचएफएल के कपिल वधावन के साथ आपराधिक साजिश रची थी। इसके तहत कपूर और उनके परिवार के सदस्यों को उनकी कंपनियों के मार्फत उल्लेखनीय अनुचित फायदे मिले।
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