नयी दिल्ली, 19 जून उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा गौतम नवलखा की जमानत याचिका पर विचार किए जाने पर नाखुशी जाहिर की है, खास तौर पर तब जब न्यायालय कार्यकर्ता को ऐसी ही राहत देने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए उसे, तय समय पर आत्मसमर्पण करने को कह चुका है।
जनवरी 2018 में पुणे जिले के कोरेगांव भीमा गांव में हुई हिंसा के सिलसिले में पुणे पुलिस ने नवलखा को अगस्त 2018 में गिरफ्तार किया था।
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हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने ट्रांजिट रिमांड के आदेश को दरकिनार कर दिया।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा कि इस संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा दो जून को दिए गए अंतरिम आदेश लागू रहेंगे।
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न्यायालय ने अदालत के 27 मई के फैसले पर रोक लगा दी। अदालत ने इस फैसले में नवलखा को दिल्ली के तिहाड़ जेल से मुंबई ले जाने में जल्दबाजी दिखाने को लेकर एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की खिंचाई की थी।
सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से उपस्थित हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने कहा कि निचली अदालत से रिकॉर्ड मंगवाने का दिल्ली उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र नहीं बनता है।
पीठ ने कहा, ‘‘जब हमने समान आधार पर उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें समर्पण करने को कहा था, ऐसे में दिल्ली उच्च न्यायालय को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करने का क्या अधिकार है।’’
लेखी ने कहा कि एनआईए ने नवलखा को मुंबई ले जाने में जल्दबाजी नहीं दिखायी है क्योंकि निचली अदालत इस संबंध में पेशी वारंट जारी कर चुकी थी।
नवलखा की ओर से पेश हुए शदन फारासात ने कहा कि उनके पास एनआईए की याचिका की प्रति नहीं है और वह मिलने के बाद ही जवाब दिया जा सकेगा।
पीठ ने याचिका की एक प्रति नवलखा को मुहैया कराये जाने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई में करना तय किया।
पीठ ने कहा कि अगले आदेश तक अंतरिम आदेश ही प्रभावी होंगे।
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