देश की खबरें | बंगाल : ममता बनर्जी ने प्रदर्शनकारी चिकित्सकों को ‘धमकी’ देने के आरोपों का खंडन किया

कोलकाता, 29 अगस्त पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्होंने सरकारी अस्पतालों के कनिष्ठ चिकित्सकों को कोई धमकी नहीं दी है। ये चिकित्सक आर जी कर अस्पताल की एक महिला चिकित्सक से कथित तौर पर दुष्कर्म और हत्या की घटना के विरोध में 21 दिन से हड़ताल कर रहे हैं।

बनर्जी ने कहा कि कुछ लोगों ने उन पर प्रदर्शन कर रहे कनिष्ठ चिकित्सकों को धमकी देने का आरोप लगाया है, जो ‘‘पूरी तरह से गलत’’ है और दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा है।

उन्होंने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘मैं साफ तौर पर कहना चाहती हूं कि मैंने (मेडिकल आदि) छात्रों या उनके प्रदर्शन के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा है। मैं उनके आंदोलन का पूरा समर्थन करती हूं। उनका आंदोलन जायज है। मैंने उन्हें कभी धमकी नहीं दी। धमकी देने का यह आरोप पूरी तरह से झूठा है।’’

तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने बुधवार को बंगाल के प्रदर्शनकारी कनिष्ठ चिकित्सकों से तत्काल काम पर लौटने के लिए विचार करने का आग्रह किया था और कहा था कि वह हड़ताली चिकित्सकों के करियर को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करना चाहतीं।

प्रदर्शनकारी चिकित्सकों ने मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को ‘‘परोक्ष रूप से धमकी’’ के तौर पर लिया काम पर लौटने की उनकी अपील को मानने से इनकार कर दिया।

बनर्जी ने यह भी कहा, ‘‘मैंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ बोला है। मैंने उनके खिलाफ इसलिए बोला है क्योंकि भारत सरकार के समर्थन से वे हमारे राज्य में लोकतंत्र को खतरे में डाल रहे हैं और अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने उनके खिलाफ आवाज उठाई है।’’

उन्होंने अपने समर्थकों को दिए गए संदेश के संबंध में भी स्पष्टीकरण जारी किया है।

ममता ने कहा, ''मैं यह भी स्पष्ट करना चाहती हूं कि कल अपने भाषण में मैंने जो वाक्यांश ("फोंश कारा") का प्रयोग किया था, वह श्री रामकृष्ण परमहंस का एक उद्धरण है। महान संत ने कहा था कि कभी-कभी आवाज उठाने की जरूरत होती है। जब अपराध और आपराधिक वारदातें होती हैं तो विरोध की आवाज़ उठनी ही चाहिए। उस मुद्दे पर मेरा भाषण महान रामकृष्ण के वक्तव्य का सीधा संदर्भ था।''

भाजपा ने बुधवार को आरोप लगाया कि बनर्जी ने विपक्ष की ओर से कथित अपमान के जवाब में अपने पुराने नारे 'बदला नहीं, बदलाव' से हटते हुए विपक्षी दलों को धमकी दी है।

तृणमूल की छात्र शाखा की रैली में बनर्जी ने कहा कि बदलते समय और परिस्थितियों के अनुरूप नारे को अद्यतन करने की जरूरत है।

उन्होंने 19वीं सदी के आध्यात्मिक संत रामकृष्ण परमहंस से जुड़ी एक कहानी का जिक्र करते हुए कहा, ''जब आपका अपमान किया जाता हो और दुष्प्रचार के माध्यम से आपको बदनाम किया जाता हो तो प्रतिरोध और विरोध करने का समय आ जाता है। हालांकि मैं कभी भी हिंसा को बढ़ावा नहीं देती, लेकिन जब आप पर ऐसे घिनौने हमले होते हैं, तो उसे चुपचाप बर्दाश्त न करें...। आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं यह आप पर निर्भर करता है।"

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