विदेश की खबरें | पशु-पक्षियों की ‘मदद’ करते समय बरतें सावधानी, आपकी वजह से खत्म हो सकती है उनकी आजादी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यूनिवर्सिटी पार्क (अमेरिका), दो जुलाई (द कन्वरसेशन) प्रकृति प्रेमियों के लिए सैर-सपाटे के लिहाज से गर्मी का मौसम बेहद आकर्षक होता है। इस दौरान पशु-पक्षी एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर जाते हैं: कछुएं अंडे दे रहे होते हैं, छोटे-छोटे पंछी उड़ना सीखते हैं, सांप अपना शिकार ढूंढते हैं और युवा स्तनधारी उभर रहे होते हैं।

मध्य पेन्सिलवेनिया में, जहां मैं रहता हूं, वहां पिछले साल अंडों से निकले चितकबरे कछुए अपने घोंसलों में शीत ऋतु बिता चुके हैं। थोड़े दिन बाद ये रैकून तथा कौवों के मुंह का निवाला बन जाते हैं। मैंने ‘किलडियर’ नामक चिड़िया को बचाया है, जिसने पार्किंग क्षेत्र में घोंसला बना रखा था। यह सड़क पर चली गई थी और नाली के एक जाल में फंस गई थी।

मैं किलडियर को सुरक्षित स्थान पर ले गया, क्योंकि यह उस जगह फंस गई थी, जिसे हम ‘पारिस्थितिकी जाल’ कह सकते हैं। मनुष्य पशु-पक्षियों के लिए मुफीद ठिकानों को तहस-नहस करके ऐसे जाल बनाते हैं। पार्किंग क्षेत्र और छतों में किलडियर के लिए वो सारी सुविधाएं होती हैं, जिनका ख्याल वे घोंसले बनाते हुए रखती हैं। हालांकि वे नालियों से दूर रहती हैं। इन दिनों उनके प्राकृतिक ठिकाने सिकुड़ते जा रहे हैं।

मैंने ‘ईस्टर्न चिपमंक’ प्रजाति की गिलहरी को ‘तौही’ नामक चिड़ियों के चूजों का शिकार करते हुए देखा है, लेकिन मैंने इसमें दखल नहीं दिया। खुले में घोंसला बनाने का बच्चों के माता-पिता का फैसला एक बुरा निर्णय हो सकता है या हो सकता है कि बच्चों की आवाज ने शिकारी का ध्यान उनकी ओर आकर्षित किया हो। गिलहरी के हाथों चिड़िया के चूजों का शिकार होने का इनमें से कोई भी कारण हो सकता है। अगर मैंने हस्तक्षेप किया होता, तो शायद नतीजे कुछ और होते।

एक वन्यजीव जीवविज्ञानी के रूप में, मैं जानता हूं कि पशु-पक्षियों को स्थानांतरित करना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गलत हो सकता है। यह उस प्राणी को भी नुकसान पहुंचा सकता है जिसकी आप मदद करना चाहते हैं।

एक वैज्ञानिक और विश्वविद्यालय के शिक्षक के रूप में अपने अनुभव के आधार पर, मैंने जानवरों के मामलों में हस्तक्षेप करने को लेकर नियम-कायदे तय कर रखे हैं। अगर मैं हस्तक्षेप करता भी हूं तो बहुत ध्यानपूर्वक विचार-विमर्श करके। इनमें पशु की स्थिति के संभावित कारणों, प्रजातियों की आबादी की स्थिति और मेरे कुछ करने से होने वाले संभावित नुकसान पर विचार-विमर्श करना शामिल है।

पशु-पक्षियों के मामलों में मेरे ध्यानपूर्वक हस्तक्षेप करने के पीछे कुछ कारण हैं।

जंगली पशु-पक्षियों का विशिष्ट आवास के साथ आनुवंशिक संबंध होता है जो कई पीढ़ियों में विकसित हुआ होता है। उन्हें स्थानांतरित करने से वह संबंध प्रभावित हो सकता हैं।

पशु-पक्षी जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाते हैं तो वे प्रजनन के माध्यम से अपनी संतान और जीन स्थानीय पशु-पक्षियों की आबादी के बीच नहीं छोड़ पाते। यह धीमी जनसंख्या वृद्धि वाली प्रजातियों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है, जैसे कई सरीसृप, जिन्हें परिपक्व होने में कई साल लग सकते हैं और वे अपने जीवनकाल में केवल कुछ ही बच्चे पैदा कर पाते हैं।

इस तरह की प्रजातियों में जनसंख्या का आकार ऊंचा रखने के लिए परिपक्व मादाएं महत्वपूर्ण हैं। जब आबादी छोटी होती है, तो वे आनुवंशिक विविधता खो देते हैं। वन्यजीवों को स्थानांतरित करने से कहीं और नए जीन भी आ सकते हैं, जिससे समय के साथ आनुवंशिक बदलाव हो सकते हैं जो प्राकृतिक चयन के माध्यम से विकसित नहीं हुए हैं।

जो पशु-पक्षी किसी स्थान पर बिना किसी परेशानी के रहते हैं, वे अधिक संतानें पैदा करते हैं, और इससे वंशानुगत आनुवंशिक विविधता अधिक सामान्य हो जाती है तथा स्थानीय पर्यावरण से जुड़ जाती है। सुरक्षित रहने के लिए यह जरूरी होता है।

एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले पशु-पक्षी नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। दूसरी जगह से आए पशु-पक्षी उस स्थान पर जीवित नहीं रह पाते, जहां पहले से अन्य प्राणियों का दबदबा हो।

इसके अलावा भी कई और कारण है, जिनको ध्यान में रखते हुए हमें पशु-पक्षियों का ठिकाना बदलने से पहले काफी विचार-विमर्श करना चाहिए। यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं या फिर कुदरत को गहराई से समझते हैं, तो पशु-पक्षियों के मामले में हस्तक्षेप करने से पहले इन बातों को ध्यान में रख सकते हैं। ऐसा करने से न सिर्फ आप इनकी अच्छी तरह से मदद कर पाएंगे बल्कि इनके सामने आने वाली पारिस्थितिकीय समस्याओं का भी आसानी से हल निकाल सकेंगे।

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