BCCI के ’सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ को बहुतुले की जगह नया स्पिन गेंदबाजी कोच मिलेगा

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई)’ को साईराज बहुतुले की जगह जल्द ही नया स्पिन गेंदबाजी कोच मिलेगा. बहुतुले ने इस साल की शुरुआत में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स से जुड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया था.

बीसीसीआई (Photo Credit: X Formerly Twitter)

नयी दिल्ली, 28 मार्च : भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई)’ को साईराज बहुतुले की जगह जल्द ही नया स्पिन गेंदबाजी कोच मिलेगा. बहुतुले ने इस साल की शुरुआत में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स से जुड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया था. सीओई को पहले राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के रूप में जाना जाता था. यह अब बेंगलुरु में नये स्थल पर स्थानांतरित हो गया है.

यह पद  बहुतुले के जाने के बाद से  रिक्त पड़ा है और अब बोर्ड ने इस पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, जो ‘भारत की सीनियर टीमों (पुरुष और महिला), भारत ए, अंडर-23, अंडर-19, अंडर-16 और अंडर-15 टीमों तथा बीसीसीआई सीओई में प्रशिक्षण लेने वाले राज्य संघ के खिलाड़ियों सहित सभी प्रारूपों और आयु समूहों में भारत की स्पिन गेंदबाजी प्रतिभा के विकास और प्रदर्शन में सुधार के लिए महत्वपूर्ण होगा.’ यह भी पढ़ें : NZ vs PAK 2025, McLean Park Pitch Stats & Records: न्यूज़ीलैंड बनाम पाकिस्तान नेपियर वनडे से पहले जानें मैकलीन पार्क की पिच रिकॉर्ड्स, मोस्ट रन, विकेट समेत खास आंकड़े

स्पिन गेंदबाजी कोच सीओई में क्रिकेट प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण को जवाबदेह होगा. बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने यहां जारी मीडिया विज्ञप्ति में कहा, ‘‘स्पिन गेंदबाजी कोच बीसीसीआई सीओई के क्रिकेट प्रमुख के साथ मिलकर काम करेगा ताकि विशेष कोचिंग कार्यक्रम तैयार कर उस पर अमल किया जा सके और खिलाड़ियों के प्रदर्शन निगरानी में सहायता की जा सके.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस भूमिका के लिए चयनकर्ताओं, राष्ट्रीय और राज्य कोचों, प्रदर्शन विश्लेषकों और स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग विशेषज्ञों के साथ मिलकर उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण योजनाएं विकसित करना भी शामिल है.’’

नये स्पिन गेंदबाजी कोच की प्रमुख जिम्मेदारियों में से सबसे अहम सीओई में चोटिल क्रिकेटरों का रिहैबिलिटेशन और मैच फिटनेस प्रमाणन होगा. इस पद की अनिवार्य आवश्यकताओं में प्रशिक्षण सत्रों की योजना बनाना और उन्हें क्रियान्वित करने के साथ व्यक्तिगत तकनीकी कोचिंग तथा खिलाड़ियों के लिए व्यक्तिगत योजना बनाना भी शामिल है. कोच को तकनीकी रूप से कुशल होने के साथ-साथ बायोमैकेनिक्स का ज्ञान और जीपीएस डिवाइस में संग्रहीत डेटा को समझने की क्षमता भी होनी चाहिए. इस पद के लिए वही योग्य होगा जो भारत का पूर्व खिलाड़ी हो या उसे प्रथम श्रेणी के 75 मैचों का अनुभव हो. हाई परफॉरमेंस कोच के रूप में पिछले अनुभव को मान्यता दी जाएगी. इसके साथ ही बीसीसीआई लेवल दो या तीन का प्रमाण पत्र भी आवश्यक है.

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