देश की खबरें | बीसीएएस ने ड्रोन परिचालन प्रणाली के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, दो अगस्त विमानन सुरक्षा नियामक बीसीएएस ने ड्रोन परिचालन प्रणालियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो जमीन पर कॉकपिट की तरह काम करते हुए इस मानवरहित हवाई वाहन का दूर से संचालन करती हैं।

बीसीएएस ने उन नियमों की सूची बनाई है जिनका साइबर सुरक्षा, भंडारण क्षमता, ड्रोन परिचालन प्रणालियों या दूर से संचालित विमान प्रणालियों के लिए स्टाफ के प्रशिक्षण एवं पृष्ठभूमि जांच के संबंध में पालन किया जाना चाहिए।

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दूर से संचालित विमान (आरपीए), इससे जुड़े संचालन केंद्र, इसके जरूरी आदेश एवं नियंत्रण लिंक आदि मिलकर दूर से संचालित वायु प्रणाली (आरपीएएस) बनती है।

नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के दिशा-निर्देशों में कहा गया है, “आरपीए और भंडारण क्षमता के भीतर सीसीटीवी कैमरा लगाना सुनिश्चित करें। लघु एवं सूक्ष्म को छोड़कर सभी श्रेणी के आरपीए के लिए 30 दिन की रिकॉर्डिंग रखने की क्षमता हो।”

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सूक्ष्म श्रेणी का ड्रोन या आरपीए वो होता है जिसका वजन 250 ग्राम से कम होता है। अगर इसका वजन 250 ग्राम से दो किलोग्राम के बीच रहता है तो यह लघु श्रेणी में आएगा।

बीसीएएस के मुताबिक, आरपीएएस में संचालन केंद्र की प्रकृति “निश्चित और स्पष्ट’’ होती है जबकि व्यावसायिक विमानों की प्रकृति “सीमित” होती है जहां घुसपैठ और भारी हथियारों के प्रयोग की आशंका कम होती है।

इसमें कहा गया कि इसलिए गैरकानूनी हस्तक्षेपों के खिलाफ दूरदराज के संचालन केंद्रों के परिसर की “संभावित संवेदनशीलता” पर और विचार किया जाना चाहिए।

दिशा-निर्देशों में कहा गया, “विमान (ड्रोन) को उड़ान के लिए इस तरह से संग्रहित और तैयार किया जाना चाहिए जिससे उसमें छेड़छाड़ को रोका जा सके और महत्त्वपूर्ण भागों की अखंडता सुनिश्चित हो सके।”

इसके मुताबिक डेटा एवं संचार लिंक तथा सेवाओं की सुरक्षा ड्रोन और उनके दूरस्थ संचालन केंद्रों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है।

इसमें कहा गया, “इसी अनुसार, यह सुनिश्चित किया जाए कि वे (लिंक और सेवाएं) हैकिंग, धोखाधड़ी और अन्य प्रकार के हस्तक्षेप या दुर्भावनापूर्ण हाइजैक से बचे रहें।”

दिशा-निर्देशों में कहा गया कि इसके अलावा ड्रोन संचालक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके प्रत्येक स्टाफ को बीसीएएस की अनुशंसा के अनुरूप एक दिवसीय ऑनलाइन विमानन सुरक्षा जागरुकता प्रशिक्षण प्राप्त हो।

इसमें यह भी कहा गया कि किसी तरह की सुरक्षा घटना या दुर्घटना होने पर इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस, बीसीएएस नियंत्रण कक्ष और बीसीएएस के क्षेत्रीय निदेशक को बिना किसी देरी के दी जानी चाहिए।

इनमें कहा गया कि आरपीएएस के संचालक को इनके परिचालन से पहले स्थानीय प्रशासन और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से जरूरी अनुमति लेनी होगी।

नागर विमानन मंत्रालय ने आठ जून से गैर-अनुपालन वाले ड्रोनों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी जो डीजीसीए के साथ पंजीकृत नहीं हैं और जिन्हें ड्रोन पावती संख्या (डीएएन) नहीं दी गई थी।

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