नयी दिल्ली, 24 अप्रैल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बीओएम) का शुद्ध लाभ 31 मार्च को समाप्त बीते वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही में दोगुना से अधिक होकर 840 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। फंसे कर्ज में कमी और ब्याज आय में बढ़ोतरी से बैंक का मुनाफा बढ़ा है।
बीओएम ने सोमवार को शेयर बाजारों को भेजी सूचना में यह जानकारी दी। इससे पिछले वित्त वर्ष यानी 2021-22 की मार्च तिमाही में बैंक ने 355 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था।
बैंक की कुल आय भी आलोच्य तिमाही में 3,949 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,317 करोड़ रुपये हो गई। इस दौरान उसकी ब्याज आय भी बढ़कर 4,495 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले की इसी अवधि में यह 3,426 करोड़ रुपये थी।
बैंक की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) 31 मार्च, 2023 तक घटकर कुल ऋण का 2.47 प्रतिशत रहीं। 31 मार्च, 2022 तक यह 3.94 प्रतिशत पर थीं।
इस दौरान बैंक का शुद्ध एनपीए भी 0.97 प्रतिशत से घटकर 0.25 प्रतिशत रह गया।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रबंध निदेशक ए एस राजीव ने संवाददाताओं से कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) मानदंडों को पूरा करने के लिए चालू वित्त वर्ष (2023-24) की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बैंक की शेयर बिक्री के जरिये 1,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि बाजार की स्थिति के आधार पर अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (एफपीओ) या पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) से 1,000 करोड़ रुपये और जुटाए जाएंगे।
बैंक पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च) में ही 1,000 करोड़ रुपये की शेयर बिक्री योजना के साथ तैयार था लेकिन बाजार में अनिश्चितता के वह इसे अमलीजामा नहीं पहना सका।
उन्होने कहा कि हिस्सेदारी बिक्री के बाद बैंक में सरकार की हिस्सेदारी घटकर 83-84 प्रतिशत रह जाएगी।
इस समय बैंक में भारत सरकार की 90.97 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
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