नागपुर, आठ दिसंबर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस और चीनी सिरप के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र के फैसले से उत्पन्न समस्या का अगले दो दिन में कोई समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
वित्त मंत्रालय का भी प्रभार संभालने वाले पवार ने राज्य विधानसभा में कहा कि केंद्र का यह निर्णय ‘अचानक’ आया है। उन्होंने बताया कि देश में चीनी के शीर्ष उत्पादकों में से एक महाराष्ट्र में कई चीनी मिलों ने एथनॉल संयंत्र स्थापित करने में भारी निवेश किया है।
घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्र ने बृहस्पतिवार को इस महीने से शुरू होने वाले 2023-24 आपूर्ति वर्ष में एथनॉल उत्पादन के लिए ‘गन्ना के रस और चीनी के सिरप’ के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि, सरकार ने 2023-24 में एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के उप-उत्पाद ‘बी-शीरा’ के उपयोग की अनुमति दी है।
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की सरकार की पहल के तहत एथनॉल को ईंधन के साथ मिश्रित किया जाता है।
कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) विधायकों द्वारा सदन में यह मुद्दा उठाने पर पवार ने कहा, ‘‘गन्ने के रस से एथनॉल के उत्पादन पर प्रतिबंध अचानक लगाया गया है। कई चीनी मिलों ने अपनी पांच प्रतिशत पूंजी और 95 प्रतिशत धनराशि बाहर से उधार लेकर एथनॉल संयंत्रों में निवेश किया है।”
विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि केंद्र के इस फैसले से महाराष्ट्र की चीनी मिलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिन्होंने गन्ने के रस और शीरे से एथनॉल का उत्पादन करने के मकसद से संयंत्र स्थापित करने के लिए कर्ज लिया है।
पवार ने कहा, “मैंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और राज्य के सहकारिता मंत्री दिलीप वलसे-पाटिल के साथ चर्चा की है। मैंने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से भी बात की, जिन्होंने मुझे अगले दो दिनों में इसका समाधान निकालने का आश्वासन दिया।”
उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई समाधान नहीं निकला तो हम नयी दिल्ली जाएंगे और उनके (शाह) साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। मैंने यह मामला केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के सामने भी उठाया है।’’
सभी चीनी मिलों और डिस्टिलरी को पत्र लिखकर खाद्य मंत्रालय ने 2023-24 एथनॉल आपूर्ति वर्ष (दिसंबर-नवंबर) के दौरान एथनॉल उत्पादन के लिए ‘‘गन्ने के रस और चीनी के रस का उपयोग नहीं करने’’ का निर्देश दिया।
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