नयी दिल्ली, 31 जनवरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रव्यापी आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए बेहद मददगार साबित हुई है और इसके तहत 50 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई है।
बजट सत्र के पहले दिन संसद की संयुक्त बैठक में अपने पहले अभिभाषण में मुर्मू ने यह भी कहा कि भारत ने कोविड महामारी से बचाव के लिए दो साल में कोविड रोधी टीके की 220 करोड़ से अधिक खुराक लोगों को दी हैं।
उन्होंने अपने अभिभाषण में कहा, ‘‘गरीबी हटाओ- अब केवल नारा नहीं रह गया है। अब मेरी सरकार द्वारा गरीब की चिंताओं का स्थायी समाधान करते हुए, उसे सशक्त बनाने का काम किया जा रहा है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने देश के करोड़ों गरीबों को और गरीब होने से बचाया है और उनके 80 हजार करोड़ रुपए बीमारियों के इलाज पर खर्च होने से बचाए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘गरीबी का एक बहुत बड़ा कारण बीमारी होती है। गंभीर बीमारी की वजह से गरीब परिवार का हौसला पूरी तरह से टूट जाता है, और इलाज पर भारी भरकम खर्च की वजह से उसकी पीढ़ियां कर्ज में डूब जाती हैं। गरीब को इस चिंता से मुक्त करने के लिए राष्ट्रव्यापी आयुष्मान भारत योजना शुरु की गई। इसके तहत 50 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई।’’
मुर्मू ने कहा, ‘‘आयुष्मान भारत योजना ने देश के करोड़ों गरीबों को और अधिक गरीब होने से बचाया है, उनके 80 हजार करोड़ रुपए बीमारियों के इलाज पर खर्च होने से बचाए हैं।’’
उन्होंने कहा कि आज देशभर में करीब नौ हजार जन औषधि केन्द्रों में बहुत कम कीमत में दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं जिससे बीते कुछ सालों में गरीबों के करीब 20 हजार करोड़ रुपए बचे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस तरह सिर्फ आयुष्मान भारत और जन औषधि परियोजना से ही देशवासियों को एक लाख करोड़ रुपए की मदद हुई है।
मुर्मू ने यह भी कहा कि भारत ने कोविड महामारी से बचाव के लिए दो साल में कोविड रोधी टीके की 220 करोड़ से अधिक खुराक लोगों को दी हैं। उन्होंने कहा कि आज हर जिले में सरकार मेडिकल कॉलेज भी बनवा रही है। उन्होंने कहा ‘‘साल 2004 से 2014 के बीच देश में जहां 145 मेडिकल कॉलेज खुले थे, वहीं मेरी सरकार के दौरान 2014 से 2022 तक 260 से अधिक मेडिकल कॉलेज खोले जा चुके हैं। मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट सीटों की संख्या अब पहले के मुकाबले देश में दोगुनी हो चुकी है।’’
उन्होंने कहा कि आज भारत जहां योग और आयुर्वेद जैसी अपनी पुरातन विधाओं को पूरी दुनिया तक पहुंचा रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह, ‘‘विश्व की फार्मेसी’’ की नई पहचान को भी सशक्त कर रहा है।
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