नयी दिल्ली, 16 मई वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी आर चौधरी ने मंगलवार को कहा कि भारतीय वायुसेना की साजोसामान क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डिजिटलीकरण, स्वचालन और आंकड़ों के विश्लेषण का उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने एक सेमिनार को संबोधित करते हुए, कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन संघर्ष और व्यापार बाधाओं के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान का भी उल्लेख किया तथा ऐसी कमजोरियों से बचाव का आह्वान किया।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं तेजी से जटिल होती जा रही हैं लेकिन परस्पर रूप से जुड़ी हुई हैं, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और प्रौद्योगिकियों की प्रगति से प्रेरित हैं तथा रक्षा क्षेत्र भी इस प्रवृत्ति का अपवाद नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना अपनी लड़ाकू क्षमता को सर्वश्रेष्ठ स्तर पर बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण घटकों, उपकरणों और सेवाओं की आपूर्ति के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘हाल के दिनों में विश्व ने कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन संघर्ष, व्यापारिक बाधाओं, पर्यावरण अनुपालन नीतियों जैसे कई एवं विविध व्यवधानों का सामना किया है। इस प्रकार की घटनाओं ने व्यवधानों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं की समस्याओं को उजागर किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘डिजिटलीकरण, स्वचालन एवं आंकड़ों के विश्लेषण का लाभ उठाते हुए इस प्रकार के व्यवधानों को कम करने के लिए वायुसेना की साजोसामान क्षमताओं को बढ़ाया जाना चाहिए।’’
चौधरी राष्ट्रीय साजोसामान प्रबंधन संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे जिसका विषय ‘‘व्यवधानों को दूर करते हुए साजोसामान क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उभरती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का लाभ उठाना’’ था।
प्रमुख वक्ताओं ने सेमिनार के विषयों से संबंधित मुद्दों पर तीनों सत्रों में विचार-विमर्श किया।
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