म्यामां में 3.7 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं, हालांकि कोरोना वायरस के मामलों में हाल में आई उछाल के मद्देनजर मतदान में कमी की आशंका जतायी जा रही है।
वर्ष 2015 में हुए चुनाव में लोगों में पांच दशक पुराने सेना के शासन का अंत करने के मिले अवसर को लेकर उत्साह था।
सैन्य शासन के खिलाफ कई वर्षों तक अहिसंक आंदोलन चलाने वाली सूची को इन चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल हुआ था और इस साल भी उम्मीद जताई जा रही है कि उनकी पार्टी को जीत मिलेगी।
हालांकि कुछ आलोचकों का मानना है कि सू ची का प्रशासन लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखने में विफल हुआ है।
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आलोचकों का मानना है कि 75 वर्षीय सू ची और उनकी पार्टी लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम करने की बजाय खुद को सत्ता में रखने के लिए अधिक काम कर रही है।
यंगून (ने पी ता) स्थित ताम्पादीपा संस्थान के निदेशक खिन जा विन ने कहा, “इस बार न तो आंग सान सू ची न ही उनकी पार्टी म्यांमा में लोकतंत्र लाने की कोशिश कर रही है। इसकी बजाय वह एक पार्टी व्यवस्था कायम करना चाहते हैं।”
उन्होंने कहा कि अन्य पार्टियों को कमजोर करने का मतलब है कि अभियान के दौरान नीतियों पर चर्चा को सीमित कर देना।
उन्होंने कहा कि म्यांमा को राजनीतिक दलों का बेहतर सम्मिश्रण चाहिए।
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