जरुरी जानकारी | लेखा परीक्षकों से हर बिल, सौदे पर गौर करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती: आईसीएआई अध्यक्ष

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के नव निर्वाचित अध्यक्ष अनिकेत तलाती ने बृहस्पतिवार को कहा कि लेखा परीक्षकों से हर एक बिल और लेन-देन को देखने और उसपर गौर करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। लेकिन यह जरूर उम्मीद की जाती है कि वित्तीय विवरण में सूचना गलत नहीं हो।

लेखा परीक्षकों की भूमिका जांच के घेरे में आने के बीच उन्होंने यह बात कही। खासकर आईएलएंडएफएस संकट के बाद लेखा परीक्षकों की भूमिका जांच के दायरे में आई है।

इस साल फरवरी में अध्यक्ष चुने गये तलाती ने कहा, ‘‘हमारा लेखा मानक आज काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। जब कोई सूचीबद्ध कंपनी साल के अंत में 45 दिन और 60 दिन में तिमाही वित्तीय परिणाम दे रही है, तो यह कभी नहीं सोचा जा सकता है कि आप हर एक लेन-देन को देखेंगे। यह एक लेखापरीक्षा की अपेक्षा कभी नहीं रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कंपनी के लेखा परीक्षक से सभी बिलों और लेन-देन पर गौर करने की अपेक्षा कभी नहीं रही है। उनसे उच्चतम स्तर की ईमानदारी की जरूर अपेक्षा की जाती है। लेखा परीक्षण करने वाली इकाई के पास रिपोर्टिंग मानकों और रिपोर्टिंग दायित्वों में तकनीकी क्षमता होनी चाहिए।’’

‘ऑडिट पेशे’ के भविष्य के बारे में तलाती ने कहा कि देश के सेवा निर्यात में लेखा परीक्षकों का योगदान मार्च, 2023 में बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया जो बीते साल इस दौरान 29 प्रतिशत था।

अडाणी-हिंडनबर्ग रिपोर्ट विवाद मामले में आईसीएआई के अध्यक्ष ने कहा कि मामला अब न्यायालय के विचाराधीन है। उच्चतम न्यायालय की तरफ से नियुक्त समिति हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में अडाणी समूह पर धोखाधड़ी और नियामकीय स्तर पर गड़बड़ी के आरोप तथा उसके बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट की जांच कर रही है।

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