नयी दिल्ली, 15 दिसंबर चीन में श्वसन संबंधी बीमारियों में वृद्धि की खबरों के मद्देनजर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के तहत आने वाले ‘वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरीज’ (वीआरडीएल) नेटवर्क को गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (एसएआरआई) के सभी नमूनों की जांच करने के लिए कहा गया है।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
बघेल ने कहा, ‘‘हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन में सांस की बीमारी में वृद्धि के संदर्भ में किसी भी व्यापार/यात्रा प्रतिबंध की सिफारिश नहीं की है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय चीन के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर उभरती स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।’’
उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 22 और 23 नवंबर को जारी बयानों में उत्तरी चीन में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) के मामलों में वृद्धि की सूचना दी है, जो अक्टूबर से देखी जा रही है।
मंत्री ने कहा कि चीनी अधिकारियों ने इसे ज्ञात रोगजनकों (इन्फ्लूएंजा, माइकोप्लाज्मा निमोनिएई, रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) और एसएआरएस-सीओवी-2 सहित) के प्रसार में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
डब्ल्यूएचओ ने उत्तरी चीन में बच्चों में अज्ञात निमोनिया के क्लस्टर (समूहों) की भी सूचना दी है।
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