देश की खबरें | एएसजी ने गुजरात उच्च न्यायालय को बताया, कर चोरी के मामले में अधिवक्ता के परिसरों पर पड़े छापे

अहमदाबाद, 18 दिसंबर आयकर विभाग ने सोमवार को गुजरात उच्च न्यायालय को सूचित किया कि एक वकील के परिसर की तलाशी उसके पेशे की वजह से नहीं, बल्कि कर चोरी की जांच के तहत ली गई थी।

विभाग ने दावा किया कि वकील और जिन समूहों का वह प्रतिनिधित्व करते हैं, उनके खिलाफ मुकदमा चलाने योग्य कुछ सबूत मिले हैं।

न्यायमूर्ति भार्गव करिया और न्यायमूर्ति निरल मेहता की पीठ 45 वर्षीय मौलिक सेठ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सेठ उच्च न्यायालय में वकालत करते हैं और उन्होंने आयकर विभाग द्वारा उनके आवास और कार्यालय पर की गई छापेमारी को यह कहते हुए चुनौती दी है कि यह उनके निजता के संवैधानिक अधिकार व वकील-मुवक्किल विशेषाधिकार का उल्लंघन है।

आयकर विभाग का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (उच्चतम न्यायालय) एन. वेंकटरमण ने अदालत को सूचित किया कि वकील-मुवक्किल विशेषाधिकार के बारे में साक्ष्य अधिनियम की धारा 126 इस विशेष मामले पर लागू नहीं होती है, क्योंकि सेठ कथित तौर पर एक मिलीभगत एजेंट और अपराध में भागीदार हैं, इसलिए इस मामले में एक वकील के रूप में मिला विशेषाधिकार खो देते हैं।

उन्होंने कहा कि विभाग ने शुरुआत में तीन समूहों की जांच की, लेकिन इस दौरान कर चोरी की जानकारी मिली, जो न केवल इन समूहों तक सीमित थी, बल्कि कई अन्य लोग भी मामले में संलिप्त थे।

एएसजी ने कहा कि हालांकि, जांच शुरुआती चरण में है और जैसे-जैसे यह आगे बढ़ेगी और अधिक दस्तावेज जब्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक जो भी मिला है, उसमें याचिकाकर्ता, तीन लक्षित समूहों और उनके द्वारा देखे गए अन्य मामलों में ‘अभियोग चलाने योग्य सबूत’ पाए गए हैं

उन्होंने कहा,‘‘हमने किसी खास पेशेवर या उसके पेशे को निशाना नहीं बनाया है। दंपति (याचिकाकर्ता और उसकी पत्नी) अपने पेशे से इतर किसी और काम में लगे हुए थे, जिसपर हमने कार्रवाई की।’’

सेठ ने अपनी याचिका में दावा किया कि आयकर अधिकारियों ने तीन नवंबर से तीन दिनों तक उनके आवास पर तलाशी ली और उनकी पत्नी, नाबालिग बेटे और बेटी के आईफोन से डिजिटल डेटा की प्रतियां बनाईं।

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