जरुरी जानकारी | मुक्त व्यापार में आयातित माल के ‘मूल स्थान के नियम’ को लागू करने की व्यवस्था तय

नयी दिल्ली, 23 अगस्त सरकार ने मुक्त व्यापार करार (एफटीए) के तहत आयातित उत्पादों पर शुल्क में छूट/रियायत देने के लिए उत्पाद के ‘मूल स्थान के नियमों’ पर अमल की नयी व्यवस्था तय की है।

खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों का आयात रोकने तथा एफटीए में भागीदार देश के जरिये किसी तीसरे देश के उत्पादों की डंपिंग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया हैं

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राजस्व विभाग ने सीमा शुल्क (व्यापार समझौतों के लिए उत्पत्ति नियमों के प्रशासन) नियम, 2020 को अधिसूचित कर दिया है। ये नियम 21 सितंबर, 2020 से लागू होंगे।

इसमें कहा गया है कि ये नियम भारत में आयातित उन उत्पादों पर लागू होंगे जिन पर आयातक व्यापार समझौते के तहत शुल्क में छूट या रियायत का दावा करेंगे।

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इन प्रावधानों के तहत जिस देश ने भारत के साथ एफटीए किया है वह किसी तीसरे देश के उत्पाद को सिर्फ लेबल लगाकर भारतीय बाजार में डंप नहीं कर सकता। उसे संबंधित उत्पाद को भारतीय बाजार में निर्यात करने के लिए एक निर्धारित मूल्यवर्धन करना होगा। उत्पाद के मूल स्थान या उत्पादन की मूल जगह के नियमों से देश में उत्पादों की डंपिंग को रोकने में मदद मिलेगी।

भारत ने जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और आसियान के सदस्यों सहित कई देशों के साथ मुक्त व्यापार करार किया है।

इस तरह के समझौतों में दो व्यापारिक भागीदार देश आपसी व्यापार वाले उत्पादों पर आयात/सीमा शुल्क को उल्लेखनीय रूप से घटा देते हैं या पूरी तरह हटा देते हैं।

अधिसूचना के अनुसार व्यापार करार के तहत तरजीही शुल्क दर के दावे के लिए आयातक या उसके एजेंट को बिल जमा कराते समय यह घोषणा करनी होगी कि संबंधित उत्पाद तरजीही शुल्क दर के लिए पात्र है। उसे संबंधित उत्पाद के मूल स्थान या उत्पत्ति-स्थल का प्रमाणन भी देना होगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि सरकार ‘मूल स्थान के नियम’ की समीक्षा करेगी। विशेषरूप से संवेदनशील उत्पादों के मामले में ऐसा किया जाएगा। इससे मुक्त व्यापार करार का हमारी नीति की दिशा से तालमेल सुनिश्चित होगा।

इस अधिसूचना पर एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के वरिष्ठ भागीदार रजत मोहन ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के आह्वान के तहत भारत द्वारा दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के साथ किए गए विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों में मूल स्थान के नियमों का एक स्पष्ट, पारदर्शी और उचित तरीके से प्रशासन महत्वपूर्ण हो जाता है।

मोहन ने कहा कि इन नियमों से भारत और विदेश में कंपनियों को उचित अधिकारियों द्वारा व्यापार समझौतों के तहत तरजीही शुल्क के आकलन के लिए अपनाई जाने वाली समूची प्रक्रियाओं के बारे में पता चल सकेगा।

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