नई दिल्ली: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों (Central Government Employees) और पेंशनभोगियों (Pensioners) के वेतन ढांचे में सुधार के लिए गठित '8वें केंद्रीय वेतन आयोग' (8th Central Pay Commission) (8th CPC) की प्रक्रिया अब परामर्श के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है. हालांकि आयोग का कार्यकाल आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी 2026 से शुरू माना जा रहा है, लेकिन संशोधित वेतन का वास्तविक कार्यान्वयन आयोग की अंतिम रिपोर्ट और कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही होगा. इस बीच, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (All India Trade Union Congress) (AITUC) सहित प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने मुद्रास्फीति और करियर में ठहराव जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार को अपने विस्तृत प्रस्ताव सौंपे हैं. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट, सिर्फ सैलरी ही नहीं, काम के आधार पर इन्क्रीमेंट और DA मर्जर की तैयारी में सरकार
फिटमेंट फैक्टर और वेतन वृद्धि पर बड़े प्रस्ताव
यूनियनों की मांगों का सबसे प्रमुख स्तंभ फिटमेंट फैक्टर में बदलाव है. AITUC ने न्यूनतम 3.0 फिटमेंट फैक्टर का औपचारिक प्रस्ताव दिया है. यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो सभी स्तरों के कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Pay) और पेंशन में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे उनके टेक-होम वेतन में सीधा इजाफा होगा.
इसके अतिरिक्त, कर्मचारी संगठन वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) की दर को भी बदलने पर जोर दे रहे हैं. वर्तमान में यह दर 3 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है. यूनियनों का तर्क है कि वर्तमान दर बढ़ती महंगाई और युवा कर्मचारियों की वित्तीय आवश्यकताओं के साथ तालमेल बिठाने में विफल रही है.
करियर और प्रमोशन सुधार: 30 साल में 5 पदोन्नति
कर्मचारियों में काम के प्रति उत्साह बनाए रखने और करियर में ठहराव को खत्म करने के लिए मौजूदा 'संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति' (MACP) प्रणाली में बदलाव की मांग की गई है. नए प्रस्ताव के अनुसार, 30 साल के करियर में कम से कम पांच प्रमोशन की गारंटी दी जानी चाहिए। अधिवक्ताओं का मानना है कि वेतन वृद्धि के एक स्पष्ट और पूर्वानुमेय पथ से कर्मचारियों की कार्यक्षमता और संतुष्टि में सुधार होगा.
पेंशन विवाद: OPS बनाम NPS
सामाजिक सुरक्षा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. AITUC ने वर्तमान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को हटाकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की अपनी मांग दोहराई है. यूनियन का कहना है कि परिभाषित पेंशन कर्मचारी का मौलिक अधिकार होना चाहिए.
पेंशन के संबंध में अन्य प्रस्तावों में शामिल हैं:
- आवधिक वृद्धि: हर पांच साल में पेंशन में 5 प्रतिशत की स्वतः वृद्धि.
- स्थिरता: बुजुर्गों के लिए मुद्रास्फीति के प्रभाव को कम करने हेतु एक सुरक्षित आय प्रवाह सुनिश्चित करना. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खबर, AITUC ने जनवरी 2026 से नया वेतनमान लागू करने की मांग की
भत्ते और स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प
यूनियनों ने महंगाई भत्ते (DA) की गणना के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) को अपडेट करने की मांग की है, ताकि यह आधुनिक घरेलू खर्चों को सही ढंग से दर्शा सके। अन्य प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- लीव एनकैशमेंट: इसकी सीमा को बढ़ाकर 450 दिन करना.
- स्वास्थ्य सेवा: सभी कर्मचारियों के लिए पूर्णतः 'कैशलेस' उपचार प्रणाली लागू करना.
- पारिवारिक सहायता: मातृत्व और पितृत्व अवकाश के प्रावधानों में सुधार.
जोखिम भत्ता और बोनस संरचना
रेलवे, रक्षा और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों के लिए उच्च जोखिम मुआवजे की मांग की गई है. इसमें ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर 2 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रस्ताव है. साथ ही, बोनस पर लगी मौजूदा 'कैप' (सीमा) को हटाने का अनुरोध किया गया है ताकि बोनस की गणना कर्मचारी के वास्तविक मूल वेतन के आधार पर की जा सके.












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