छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश), 19 अगस्त छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्ना में जाम नदी पर दो गांवों पांढुर्ना और सांवरगांव के बीच पत्थरों से खेले गये परंपरागत गोटमार मेले में बुधवार को करीब 80 लोग घायल हो गये।
इस घटना में पुलिस का एक वाहन भी क्षतिग्रस्त हुआ है।
कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने इलाके में धारा 144 लगाई थी, लेकिन गोटमार मेले में इसका खुल्लमखुला उल्लंघन किया गया। बिना मास्क पहने घूम रहे लोगों ने आपस में दूरी बनाकर रखने के नियम का पालन भी नहीं किया।
करीब 300 वर्षों से इन दो गांवों के बीच यह गोटमार का खेल खेला जा रहा है और इसमें भाग लेने वाले दोनों गांवों के लोग एक दूसरे पर पत्थर फेंकते हैं।
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छिंदवाड़ा के जिलाधिकारी सौरभ कुमार सुमन ने मीडिया को बताया, ‘‘इस गोटमार मेले में करीब 80 लोग घायल हुए हैं। इनको प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से उनके घर भेज दिया गया है।’’
सुमन ने बताया कि आज सांकेतिक रूप में मनाया जाने वाला गोटमार मेला दोनों गाँवों के लोगों के बीच आपसी समझौता कर पलाश के झाड़ को काटकर पूजा-पाठ के साथ माँ चंडी के चरणों में अर्पण कर मेले का समापन किया गया।
उन्होंने कहा कि लेकिन पूजा-पाठ कर धीरे-धीरे दोनों गाँवों के लोग एकत्रित होने लगे और एक दूसरे के ऊपर जमकर पत्थर बरसाने लगे, जिससे इन लोगों को चोटें आईं। उन्होंने कहा कि लोगों ने पुलिस के एक वाहन को भी पत्थर मारकर क्षतिग्रस्त किया है।
विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेले की परंपरा निभाने के पीछे किवंदतियां और कहानियां जुड़ी हैं। किवंदती के अनुसार पांढुर्ना के युवक और सावरगांव की युवती के बीच प्रेम संबंध था। एक दिन प्रेमी युवक ने सांवरगांव पहुंचकर युवती को भगाकर पांढुर्ना लाना चाहा। जैसे ही दोनों जाम नदी के बीच पहुचे तो सांवरगांव के लोगों को खबर लगी। प्रेमी युगल को रोकने पत्थर बरसाए, जिससे प्रेमी युगल की मौत हो गई। इस किवंदती को गोटमार मेला आयोजन से जोड़ा जाता है।
सं रावत
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