इडुक्की, 29 अप्रैल केरल के वन अधिकारियों ने कई महीनों की अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति के बाद इडुक्की जिले में राशन की दुकानों पर हमला कर चावल खाने वाले कुख्यात हाथी ‘अरिकोम्बन’ का शनिवार को आखिरकार पता लगाया और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए उसे स्थानांतरित करने के लिए बेहोश कर दिया।
हाथी काफी समय से जिले के चिन्नाकनाल और संथनपारा पंचायत क्षेत्रों की बस्तियों में भटक रहा था। यह हाथी चावल की तलाश में राशन की दुकानों और घरों पर हमला कर रहा था।
हाथी को पकड़ने के लिए आज तड़के चार बजे शुरू हुआ मिशन ‘अरिकोम्बन’ शाम छह बजे तक चला। हाथी को एक ट्रक में सूर्यनेल्ली के पास वन क्षेत्र से एक अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा है, जहां उसे देखा गया था।
उच्च न्यायालय ने पहले केरल वन विभाग को हाथी को छोड़ने वाले स्थान का खुलासा नहीं करने का निर्देश दिया था।
मिशन ‘अरिकोम्बन’ में जुटे कार्य बल के पास हाथी को शांत करने और चार कुमकी हाथियों की मदद से ट्रक में स्थानांतरित करने का काम बेहद जटिल था। जब वे बेहोश हाथी को ट्रक में डालने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें भारी बारिश और कोहरे का भी सामना करना पड़ा। हालांकि, अनुभवी कुमकी हाथी ‘अरिकोम्बन’ को ट्रक में धकेलने में सफल रहे।
कुमकी ऐसे बंदी हाथी होते हैं, जिन्हें जंगली हाथियों को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
कार्य बल ने सुबह सूर्यनेल्ली के पास अरिकोम्बन को देखा, और डॉ अरुण जकारिया के नेतृत्व में एक टीम ने इलाके को घेर लिया।
सौभाग्य से कार्य बल की टीम के लिए ‘अरिकोम्बन’ जंगल में काफी अंदर नहीं गया था, और उसे बेहोश करने के लिए पहला इंजेक्शन पूर्वाह्न 11.55 बजे लगाया गया। हाथी को बेहोश करने के लिए उसे पहला बूस्टर डोज दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर दिया गया और इसके बाद पांच और बूस्टर इंजेक्शन दिए गए।
हालांकि, जब कुमकी हाथियों ने उसे वाहन में धकेलने की कोशिश की, तो ‘अरिकोम्बन’ ने इसका बहुत प्रतिरोध किया।
कार्य बल के सदस्य भी हाथी की आंखों को काले कपड़े से नहीं ढंक सके थे, यह प्रक्रिया आमतौर पर जानवरों को बचाने के दौरान उन्हें शांत रखने के लिए की जाती है।
मिशन अरिकोम्बन कई विवादों से गुज़रा, जिसमें पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने एर्णाकुलम जिले के कोडानाड हाथी केंद्र में कुमकी हाथियों को पकड़ने और कुमकी हाथियों को तैयार करने के वन विभाग के कदम का विरोध किया था।
उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे का अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति नियुक्त की, और समिति ने हाथी को एक सुरक्षित जंगली क्षेत्र में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया जहां मनुष्यों के साथ संघर्ष की संभावना नहीं हो।
समिति ने हाथी को परम्बिकुलम बाघ अभ्यारण्य में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया था। जल्द ही, परम्बिकुलम क्षेत्र में विरोध शुरू हो गया और वहां के लोगों ने इस कदम का जमकर विरोध किया। तब उच्च न्यायालय ने सरकार से इसे अपनी पसंद की जगह पर छोड़ने को कहा और इसकी स्थिति को गुप्त रखने को कहा।
चिन्नाकनाल और संथनपारा के स्थानीय लोग इस हाथी के खिलाफ उठ खड़े हुए थे और अपने क्षेत्र से इसके स्थानांतरण की मांग कर रहे थे।
हालांकि, एक हाथी को इलाके से हटाया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY