देश की खबरें | मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार : द्रमुक

चेन्नई, 30 जून तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने शुक्रवार को जोर देकर कहा कि मंत्रियों की नियुक्ति और बर्खास्तगी पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है।

पार्टी ने नौकरी के बदले घूस मामले में गिरफ्तार मंत्री वी सेंथिल बालाजी को मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने को लेकर राज्यपाल आर एन रवि की आलोचना की। हालांकि, रवि ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद बालाजी की बर्खास्तगी के फैसले पर रोक लगा दी थी।

तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने कहा कि राज्य सरकार बालाजी को बर्खास्त करने के राज्यपाल के कदम की ‘अवहेलना’ कर रही है। उन्होंने बताया कि स्टालिन इस मामले में रवि को एक विस्तृत पत्र लिखेंगे।

द्रमुक ने यह भी कहा कि वह बालाजी को बर्खास्त करने के राज्यपाल के कदम के खिलाफ सभी राजनीतिक विकल्पों और कानूनी पहलुओं पर विचार कर सकती है। सत्तारूढ़ दल की सभी सहयोगी पार्टियों और विभिन्न विशेषज्ञों ने रवि के कदम की आलोचना की थी।

चेन्नई में कानून मंत्री एस रघुपति और राज्यसभा सदस्य पी विल्सन के साथ संवाददाताओं से मुखातिब थेन्नारासू ने स्टालिन के इस बयान को दोहराया कि राज्यपाल के पास बालाजी को बर्खास्त करने का कोई अधिकार नहीं है और इस मुद्दे से कानूनी रूप से निपटा जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि रवि ने इस मामले में ‘जल्दबाजी में’ और ‘एकतरफा’ कार्रवाई की और बिना उचित सलाह-मशविरा के बालाजी को बर्खास्त कर दिया, जिसके चलते केंद्रीय गृह मंत्रालय को कहना पड़ा कि उन्हें इस मामले में अटॉर्नी जनरल से विचार-विमर्श करना चाहिए।

थेन्नारासू ने कहा, “इस घटनाक्रम के बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि वह सेंथिल बालाजी की बर्खास्तगी के फैसले पर रोक लगा रहे हैं।”

उन्होंने बताया, “मुख्यमंत्री इस मामले में राज्यपाल को एक विस्तृत पत्र भेजने जा रहे हैं। राज्यपाल के पास सेंथिल बालाजी को बर्खास्त करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और न ही ऐसा करने का कोई संवैधानिक आधार है।”

थेन्नारासू ने कहा, “मंत्रियों की नियुक्ति और बर्खास्तगी पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है... मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को यह स्पष्ट कर दिया है और यह भी कह दिया है कि उनकी कार्रवाई वैध नहीं है।”

मंत्री ने दावा किया कि रवि ने इस मामले में जल्दबाजी में फैसला लिया, इसलिए सरकार उनके कदम को पूरी तरह से नकारती है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को कोई भी फैसला लेते वक्त ‘दिमाग का इस्तेमाल’ करना चाहिए।

इससे पहले, द्रमुक के सूत्रों ने कहा था कि पार्टी बालाजी को बर्खास्त करने के राज्यपाल के कदम के खिलाफ सभी राजनीतिक विकल्पों और कानूनी पहलुओं पर विचार कर सकती है।

उन्होंने कहा था कि द्रमुक आलाकमान इस मामले में कानूनी एवं राजनीतिक रणनीति तैयार करने के लिए अपने नेताओं और पदाधिकारियों से विचार-विमर्श कर सकता है।

द्रमुक के एक पदाधिकारी ने ‘पीटीआई-’ से कहा था, “राज्यपाल अपने फैसले से पीछे हट गए हैं और उनका पूरी तरह से पर्दाफाश हो गया है।” उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में द्रमुक को निशाना बनाने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हर चाल उल्टी पड़ रही है।

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