नैनीताल, 17 मई उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को रेलवे द्वारा लालकुआं में अपनी भूमि पर बसे अवैध कब्जाधारकों को उसे खाली करने का नोटिस दिए जाने पर रोक लगाने का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज कर दी।
उच्च न्यायालय के आदेश ने क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का रास्ता साफ कर दिया है। इससे करीब चार हजार लोग प्रभावित हो सकते हैं।
भूमि पर निवास कर रहे लोगों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने की।
रेलवे की ओर से पेश अधिवक्ता राजीव शर्मा ने अदालत को सूचित किया कि 2018 में रेलवे और राज्य सरकार ने नैनीताल जिले के लालकुआं में निरीक्षण किया था जिसमें 84 अवैध निर्माणों का पता चला था।
उन्होंने कहा कि रेलवे की जमीन पर फिलहाल टिन शेड डालकर करीब चार हजार लोग रह रहे हैं।
शर्मा ने कहा कि लालकुआं रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण के लिए जमीन की जरूरत है जिससे उसे अमृत भारत योजना से जोड़ा जा सके।
उन्होंने बताया कि रेलवे ने अतिक्रमण को हटाने के लिए जिला प्रशासन से पुलिस सुरक्षा तथा सहायता देने का आग्रह किया है।
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