देश की खबरें | ट्रैक्टर से कुचलकर एक व्यक्ति की जाने लेने वाले चार लोगों की अपील खारिज

प्रयागराज, 23 सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा पाये चार लोगों की अपील खारिज कर दी है। इन लोगों ने वर्ष 2003 में ट्रैक्टर से कुचलकर रियाजुद्दीन नामक व्यक्ति को मार डाला था क्योंकि उसका चयन शिक्षा मित्र के तौर पर हो गया था, जबकि उसी गांव के रहने वाले प्रताप सिंह का चयन नहीं हुआ था और उसने मृतक के खिलाफ मन में दुश्मनी पाल ली थी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ ने प्रताप सिंह, साधू, देवेंद्र और श्रीकृष्णा द्वारा की गई अपील खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया। इन चारों को बदायूं के अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने हत्या के लिए दोषी करार दिया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

उच्च न्यायालय ने निजली अदालत के फैसले को सही ठहराया और निर्देश दिया कि इन चार व्यक्तियों में से तीन अपीलकर्ता- साधू, देवेंद्र और श्रीकृष्णा जो जमानत पर थे, तत्काल निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करें। प्रताप सिंह पहले से ही जेल में है क्योंकि उसे जमानत नहीं मिली थी।

इस मामले में मृतक के पिता सिराजुद्दीन द्वारा 11 नवंबर, 2003 को बदायूं के उशैत पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एफआईआर के मुताबिक, 11 नवंबर, 2003 को रियाजुद्दीन तांगे से केदार चौक जा रहा था और उसे इन चार अपीलकर्ताओं द्वारा एक सुनसान जगह पर रोककर मारा पीटा गया और उसे खींचकर एक ट्रैक्टर के सामने लाया गया और प्रताप सिंह ने ट्रैक्टर से उसे कुचलकर मार डाला।

राज्य सरकार के वकील ने कहा कि रियाजुद्दीन और प्रताप सिंह दोनों ने शिक्षा मित्र पद के लिए आवेदन किया था और रियाजुद्दीन की नियुक्ति शिक्षा मित्र के पद पर हो गई जिससे प्रताप सिंह बौखला गया क्योंकि उसकी नियुक्ति नहीं हो सकी थी।

अदालत ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि प्रत्यक्ष प्रमाण के मामले में जहां विश्वसनीय आंखों देखा बयान उपलब्ध हो, मंशा बहुत प्रासंगिक नहीं रहती।

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