विदेश की खबरें | एपी, अन्य समाचार संगठनों ने ‘न्यूजरूम’ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल के मानक तय किए
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हालांकि, उसने अपने कर्मचारियों को इस प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया है।

एपी उन चुनिंदा समाचार संगठनों में से एक है जिन्होंने इस पर नियम बनाने शुरू कर दिए हैं कि ‘चैटजीपीटी’ जैसी तेजी से उभरती तकनीकों का अपने काम में कैसे इस्तेमाल करें। वह अपनी ‘स्टाइलबुक’ में इस संबंध में बृहस्पतिवार को एक अध्याय जोड़ेगी जिसमें पत्रकारों को सलाह दी जाएगी कि वह अपनी खबर को पारिभाषिक शब्दकोष के साथ कैसे पूरा करें।

एपी में समाचार मानक एवं समावेशन की उपाध्यक्ष अमांडा बैरेट ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य लोगों को यह समझने का तरीका बताना है कि कैसे हम एक छोटा-सा प्रयोग कर सकते हैं और साथ ही सुरक्षित तरीके से काम कर सकते हैं।’’

पत्रकारिता क्षेत्र के थिंक-टैंक ‘पॉयंटर इंस्टीट्यूट’ ने कहा कि यह एक ‘‘परिवर्तनकारी क्षण’’ है और उसने समाचार संगठनों से एआई के इस्तेमाल के लिए मानक बनाने तथा नीतियों को पाठकों एवं दर्शकों के साथ साझा करने का अनुरोध किया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता में कमांड देने पर पाठ, तस्वीरें, ऑडियो और वीडियो उत्पन्न करने की क्षमता है लेकिन वह अब तक तथ्य और कल्पना के बीच भेद करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हुआ है।

एपी ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न सामग्री को सावधानीपूर्वक परखना चाहिए जैसे कि किसी अन्य समाचार स्रोत से मिली सूचना की जांच की जाती है। एपी ने कहा कि इसी तरह एआई द्वारा उत्पन्न फोटो, वीडियो या ऑडियो का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

यह प्रौद्योगिकी पत्रिका ‘वायर्ड’ की नीति के अनुरूप है जिसने कहा कि वह एआई द्वारा उत्पन्न सामग्री प्रकाशित नहीं करता है।

वायर्ड ने कहा कि एआई कुछ हद तक मददगार हो सकती है। यह शीर्षक बनाने या ‘स्टोरी आइडिया’ देने में मदद कर सकता है।

अमेरिकी मीडिया कंपनी ‘इनसाइडर’ के एडिटर-इन-चीफ निकोलस कार्लसन ने कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा, ‘‘आपकी खबरें पूरी तरह आपके द्वारा लिखी होनी चाहिए। आप अपनी खबर में कहे हर शब्द की सटीकता, निष्पक्षता, मौलिकता और गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार हैं।’’

कार्लसन ने कहा कि एआई से किसी खबर को लघु बनाने तथा उसे अधिक पठनीय बनाने के लिए उसमें संभावित संपादन करने या किसी साक्षात्कार के लिए प्रश्नावली तैयार करने में मदद ली जा सकती है।

चैटजीपीटी निर्माता ‘ओपनएआई’ और द एसोसिएटेड प्रेस ने अपने उन समाचारों के संग्रह का लाइसेंस एआई कंपनी को देने के लिए एक सौदा किया था जिनका वह प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करता है।

समाचार संगठनों ने उनकी सामग्री का एआई कंपनियों द्वारा उनकी अनुमति या भुगतान के बिना इस्तेमाल करने को लेकर चिंता जतायी है।

कुछ पत्रकारों ने आशंका जतायी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता नौकरियां छीन सकती है।

बैरेट ने कहा कि सुरक्षा उपायों के साथ एपी चाहता है कि उसके पत्रकार इस प्रौद्योगिकी से परिचित हों क्योंकि उन्हें आने वाले वर्षों में इसके बारे में खबरें देने की जरूरत पड़ेगी।

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