जरुरी जानकारी | विनियोग विधेयक पारित नहीं होने से आंध्र प्रदेश सरकार का वित्तीय कामकाज रुका

अमरावती, एक जुलाई आंध्र प्रदेश विधान परिषद में विनियोग विधेयक पारित नहीं होने की वजह से राज्य सरकार के खजाने से भुगतान का काम एक तरह से बंद हो गया। इसकी वजह से सरकार कर्मचारियों को वेतन नहीं दे सकी।

ऐसा पहली बार हुआ है जब राज्य सरकार को वित्तीय भुगतान का अधिकार नहीं रह गया है क्योंकि विधानसभा में राज्य का सालाना बजट पारित नहीं हो सका है।

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राज्य सरकार तब तक सरकारी खजाने से कोई पैसा खर्च नहीं कर पायेगी जब तक कि संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है और राज्य के राज्यपाल विनियोग विधेयक को अपनी मंजूरी नहीं दे देते हैं।

राज्य के मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार अजेया कल्लम ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि यह काम शनिवार तक पूरा हो जायेगा। इसके लिये जरूरी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।’’

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विनियोग विधेयक पारित नहीं होने की स्थिति में सरकारी कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं हो पाने के साथ ही सरकार कोई अन्य खर्च भी नहीं कर सकती है।

राज्य सरकार ने हालांकि, 59 लाख लाभार्थियों को जन कल्याण पेंशन के तौर पर 1,442 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। राज्य के कृषि मंत्री के कण्ण बाबू ने कहा, ‘‘यह पैसा हमने दो दिन पहले निकाल लिया था और आज इसे वितरित किया है।’’

राज्य विधानसभा में विनियोग विधेयक 16 जून को पारित कर लिया गया था लेकिन इसे विधान परिषद में पारित नहीं कराया जा सका। राज्य की सत्ताधारी पार्टी वाएसआर कांग्रेस और विपक्षी पार्टी तेलुगू देशम पार्टी के बीच खींचतान की वजह से यह स्थिति बनी है।

राज्य में मार्च में लेखानुदान का अध्यादेश जारी किया गया था। यह 30 जून को समाप्त हो गया लेकिन बजट खर्च का मार्ग प्रशस्त करने वाला विनियोग विधेयक अभी तक कानून नहीं बन पाया है।

संविधान के मुताबिक कोई भी धन विधेयक परिषद द्वारा यदि 14 दिन के भीतर विधानसभा को नहीं लौटाया जाता है तो उसे पारित मान लिया जाता है। ‘‘14 दिन की यह अवधि आज रात को समाप्त हो रही है। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष संबंधित फाइल को विनियोग विधेयक पर राज्यपाल की सहमति के लिये भेज देंगे।’’

कल्लम ने कहा, उम्मीद है कि यह प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में पूरी हो जायेगी और गतिरोध समाप्त हो जायेगा। राज्य के कृषि मंत्री ने मौजूदा स्थिति के लिये तेलुगू देशम पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हुये विपक्ष के नेता एन. च्रदबाबू नायडू से सरकारी कर्मचारियों और राज्य के लोगों से से माफी मांगने की मांग की।

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