देश की खबरें | सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने के प्रयास के बीच विरोधियों का सामूहिक नेतृत्व पर जोर

बेंगलुरू, 29 जून कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए सिद्धरमैया को कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने के प्रयास के तहत उनके समर्थक अगस्त में एक महीने के कार्यक्रम की योजना बना रहे हैं, जब वह 75 वर्ष के हो जाएंगे। वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रमुख डी. के. शिवकुमार के समर्थकों ने सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया और कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है।

शिवकुमार के खेमे की ओर से इस बार बयान उनके भाई एवं बेंगलुरु ग्रामीण के सांसद डी. के. सुरेश की ओर से आया। इसे दोनों नेताओं के बीच खींचतान के एक और दौर के रूप में देखा जा रहा है, जो मुख्यमंत्री पद की आकांक्षा रखते हैं और पार्टी के भीतर अपने दबदबे को मजबूत करना चाहते हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब शिवकुमार और सिद्धरमैया पार्टी की तैयारियों एवं प्रचार रणनीति पर पार्टी के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी और महासचिवों के. सी. वेणुगोपाल एवं रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ चर्चा करने के लिए दिल्ली में हैं।

सूत्रों के अनुसार, सिद्धरमैया के समर्थकों और शुभचिंतकों ने तीन अगस्त को दावणगेरे के जिला मुख्यालय शहर में एक विशाल सम्मेलन की योजना बनाई है, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री के खेमे की ओर से शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आर. वी. देशपांडे और एच. सी. महादेवप्पा जैसे पूर्व मंत्री शामिल हैं।

साथ ही, सिद्धरमैया और उनके योगदान को सामने रखने के लिए तीन सितंबर तक हर जिले और विधानसभा क्षेत्र में 'सिद्धरमोत्सव' का आयोजन किया जाएगा। इसे चुनाव से पहले पार्टी के भीतर आलाकमान और विरोधियों को एक संदेश देने और उनके 'अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्गों और दलित' वोट आधार को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

महादेवप्पा ने कहा कि यह अभी तक सिद्धरमैया के शुभचिंतकों और समर्थकों के बीच एक "विचार" है और अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘... उनसे परामर्श करने के बाद ही फैसला किया जाएगा। सिद्धरमैया ने एक राजनेता, एक सांस्कृतिक नेता, एक समाजवादी के रूप में काम किया है, साथ ही सरकार में रहते हुए उनका लोकोन्मुखी काम भी रहा है... हम इसे लोगों के सामने रखना चाहते हैं तथा उन्हें सूचित करने के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा कि यह सिद्धरमैया और कांग्रेस दोनों को मजबूत करने और पार्टी को सत्ता में वापस लाने के लिए लोगों के सामने जाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास कांग्रेस के माध्यम से होगा, जबकि सिद्धरमैया द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रम वास्तव में इसे अधिक बल प्रदान करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘इस पृष्ठभूमि में, सिद्धरमैया के समर्थक, मित्र, शुभचिंतक एक साथ मिलकर जश्न मनाना चाहते हैं क्योंकि वह 75 वर्ष के हो रहे हैं। उन्होंने कभी जन्मदिन (व्यक्तिगत रूप से) नहीं मनाया। इसलिए हम उनकी राजनीतिक यात्रा, संघर्ष को पेश करते हुए एक कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं। इसका उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता उत्पन्न करना है।’’ उन्होंने सांप्रदायिकता और कट्टरवाद के खिलाफ मजबूत नेतृत्व की सराहना की।

वर्ष 2013 से 2018 के बीच मुख्यमंत्री रह चुके सिद्धरमैया ने घोषणा की है कि 2023 उनका आखिरी चुनाव होगा। उनकी आकांक्षा मुख्यमंत्री के रूप में दूसरे कार्यकाल की है, यदि पार्टी अगला विधानसभा चुनाव जीतती है। उनके समर्थकों ने खुले तौर पर सिद्धरमैया को पार्टी की बैठकों में "अगले मुख्यमंत्री" के रूप में पेश करने की कोशिश की। इसको लेकर शिवकुमार सहित अन्य वरिष्ठ नेता असहमत हैं।

इस बीच, शिवकुमार के हालिया बयान को दोहराते हुए उनके भाई सुरेश ने कहा कि कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा, ‘‘हर किसी की मुख्यमंत्री बनने की इच्छा होती है। रामलिंग रेड्डी जैसे वरिष्ठ विधायक हैं जो सात बार जीत चुके हैं, साथ ही आर. वी. देशपांडे, मल्लिकार्जुन खड़गे, जी. परमेश्वर, एम. बी. पाटिल भी आकांक्षी हैं।’’

उन्होंने कहा कि सिद्धरमैया पिछले दस वर्षों से कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं और एक बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसलिए कुछ लोग चाहते हैं कि वह एक बार फिर मुख्यमंत्री बनें। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है ... प्रदेश पार्टी अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार भी हैं।’’

सुरेश के बयान को सिद्धरमैया और उनके समर्थकों के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि उनकी राह आसान नहीं होगी।

सबसे लंबे समय तक कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके परमेश्वर ने अतीत में 'दलित मुख्यमंत्री' की मांग उठाई थी। उन्होंने हाल ही में सामूहिक नेतृत्व के आह्वान का समर्थन किया था।

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