दरअसल, अमेरिका ने चेतावनी दी है कि चीन की कंपनियां अगर शिनजियांग के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की प्रताड़ना करने में मदद करती है, तो उन्हें कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के संबंधों में कई मुद्दों को लेकर अत्यधिक तनाव बना हुआ है।
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चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका सरकार पर चीन के मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया और कहा कि वाशिंगटन ‘‘चीन की कंपनियों के दमन’’ के लिए मानवाधिकार की शिकायतों का इस्तेमाल कर रहा है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यह चीन के लिए हानिकारक है, अमेरिका के लिए हानिकारक है और पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है।’’
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उसने कहा, ‘‘चीन बहुत मजबूती के साथ अमेरिका से कहना चाहता है कि वह अपनी खराब हरकतें बंद करे।’’
मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘चीनी कंपनियों के कानूनी अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए चीन आवश्यक कदम उठाएगा।’’
अमेरिका ने एक जुलाई को चेतावनी जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि जो कंपनियां जबरन मजदूरी में धकेले गए लोगों द्वारा बनाए सामान रखती है या ऐसी प्रौद्योगिकी देती है जिसका इस्तेमाल श्रमिक शिविरों में होता हो या फिर निगरानी के लिए होता है, उन्हें ‘‘आर्थिक, कानूनी तथा साख संबंधी’’ अनिर्दिष्ट जोखिम उठाना पड़ सकता है।
चीन ने मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यक समुदायों के 10 लाख या इससे भी अधिक लोगों को नजरबंदी शिविरों में हिरासत में रखा है। सरकार इन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र बताती है।
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