विदेश की खबरें | अमेरिका ने यूक्रेन को दी जाने वाली आर्थिक मदद में की कटौती, भविष्य को लेकर उठ रहे सवाल
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

फिर भी, कई सांसदों ने स्वीकार किया है कि यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता को संसद से मंजूरी दिलाना कठिन होता जा रहा है क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है।

रिपब्लिकन पार्टी के सांसद मदद का विरोध कर रहे हैं।

इस सप्ताह संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में अनुदान विधेयक पर मतदान होने के बाद आगे की राह मुश्किल होने के संकेत मिल रहे हैं।

प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के आधे सदस्यों ने यूक्रेन को हथियार खरीदने और सैनिकों को प्रशिक्षित करने के लिए दी जाने वाली 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर की मदद के खिलाफ मतदान किया।

हालांकि बाद में अलग से इस धनराशि को मंजूरी दे दी गई, लेकिन यूक्रेन को सहायता देने का विरोध करने वालों की संख्या बढती जा रही है।

इसके बाद शनिवार को प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष और कैलिफॉर्निया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद केविन मैकार्थी ने 17 नवंबर तक सरकारी कामकाज चालू रखने के लिए पारित अनुदान विधेयक में से यूक्रेन को दी जाने वाली अतिरिक्त सहायता में कटौती कर दी। ऐसा करके उन्होंने उस लंबित पैकेज को रोक दिया, जिसके तहत यूक्रेन को छह अरब अमेरिकी डॉलर दिए जाने हैं।

अमेरिकी संसद के इस कदम से, रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को अमेरिका की ओर से मिल रहे अटूट समर्थन में धीरे-धीरे बदलाव के संकेत मिल रहे हैं और इससे स्पष्ट हो गया है कि रिपब्लिकन पार्टी यूक्रेन को और मदद मुहैया कराने के पक्ष में नहीं है।

यूक्रेन को दी जाने वाली मदद में कटौती का फैसला पिछले हफ्ते यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की वाशिंगटन में अमेरिकी सांसदों से मुलाकात के बाद किया गया है।

मुलाकात के दौरान जेलेंस्की ने सांसदों को आश्वासन दिया था कि यूक्रेन की सेना युद्ध जीत रही है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि युद्ध में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त सहायता की जरूरत होगी।

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