जरुरी जानकारी | खनिज कानूनों, निर्देशों में संशोधन क्षेत्र को खोलने, आयात निर्भरता कम करने के लिए: मंत्रालय

नयी दिल्ली, तीन जून कोयला मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि कोयला क्षेत्र संबंधी नियम कानून में सुधार का मकसद दक्षता में सुधार, कारोबार में सुगमता और कोयला क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोलना है। मंत्रालय का कहना है कि इससे घरेलू कोयला उत्पादन में सुधार होगा और आयात कम होगा।

कोयले की खोज और खनन क्षेत्र में वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का वर्चस्व रहा है। सुधारों के लिए पुराने खनिज रियायत नियम, 1960 और पर्यावरण और वन संरक्षण से संबंधित नए कानून के अस्तित्व में आने के कारण नियम कानून में संशोधन की आवश्यकता थी।

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मंत्रलाय का कहना है कि खनिज कानून (संशोधन) अधिनियम, 2020 में नीलामी के लिए कोयला/लिग्नाइट ब्लॉकों की उपलब्ध सूची को बढ़ाने व समग्र पूर्वेक्षण लाइसेंस-कम-माइनिंग लीज (“पीएल-और-एमएल”) के लिए कोयला ब्लॉकों के आवंटन के लिए प्रावधान किए गए हैं।

कोयला खनन के अनुभव के बिना भी किसी कंपनी को अपनी खपत अथवा बिक्री के लिए कोयला खनन कार्य के लिए लाइसेंस का अवसर देने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह कोयला क्षेत्र में एफडीआई नीति संबद्ध प्रसंस्करण अवसंरचना सहित कोयले की बिक्री, कोयला खनन कार्यों के लिए स्वचालित मार्ग से 100% एफडीआई की अनुमति देती है।

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इसी तरह खनिज रियायत नियम 1960 में संशोधन के बाद खनन योजना की तैयारी के लिए योग्य व्यक्तियों के पंजीकरण की अब आवश्यकता नहीं है। इस संबंध में परियोजना प्रस्तावक की घोषणा पर्याप्त होगी।

नयी व्यवस्थाओं में कोयला ब्‍लॉक आवंटित करने के लिए अब एक विकल्‍प उपलब्ध है ताकि पूर्वेक्षण कार्य कराने और भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट (जीआर) तैयार कराने के लिए एक प्रत्यायित प्रोस्पेक्टिंग एजेंसी को संलग्न किया जा सके ताकि कोयला क्षेत्र के अन्‍वेषण में तेजी लाई जा सके, प्रौद्योगिकी को लाकर विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

खनिज कानून (संशोधन) अधिनियम, 2020 के आलोक में पर्यावरण और वन संरक्षण आदि जैसे अन्य कानूनों की शुरुआत के बाद, खनन योजना में मांगी गई कई अतिव्यापी जानकारी को हटा दिया गया है।

मंजूरी के लिए समय कम करने के उद्देश्य से अनुमोदन के लिए खनन योजना के प्रसंस्करण को सरल बनाया गया है। मध्‍यस्‍थ के लिए अंतरिम व्‍यवस्‍था क्रम भंग के लिए एक अंतरिम प्रबंध के साथ सीसीओ में अधीनस्‍थ प्राधिकारी को सौंपी गई खनन योजना को मंजूरी देने का अधिकार। पारदर्शिता लाने के लिए अपील की व्‍यवस्‍था शुरू की गई।

प्रक्रिया को ऑनलाइन अनुमोदन के अनुकूल बनाया गया है ताकि ऑनलाइन एकल खिड़की प्रणाली तैयार की जा सके।

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